म्युचुअल फंड योजनाओं का वितरण करने वाली इकाइयों का कमीशन वित्त वर्ष 2022 में करीब 2.3 गुने की उछाल के साथ 10,420 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2021 में 4,625 करोड़ रुपये रहा था। उद्योग निकाय एम्फी की तरफ से जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। इस अवधि में उद्योग की औसत प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां मार्च 2021 की तिमाही के 32.1 लाख करोड़ रुपये से 19.5 फीसदी बढ़कर मार्च 2022 की तिमाही में 38.4 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
कमीशन में उछाल इक्विटी बाजारों में तीव्र बढ़ोतरी और इक्विटी एमएफ योजनाओं में लगातार हुए निवेशक की पृष्ठभूमि में हुई। इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म फिस्डम के सह-संस्थापक एस वी सुब्रमण्या ने कहा, कमीशन में उछाल की तीन मुख्य वजह है – लगातार निवेश, परिसंपत्ति की कीमत में बढ़ोतरी और कमीशन के ढांचे में किसी तरह का बदलाव न होना।
पिछले कुछ वर्षों में नियामकीय बदलाव मसलन खर्च अनुपात को उपयुक्त बनाए जाने, बी 15 से बी 30 में बदलाव से कमीशन पर प्रतिकूल असर पड़ा था। वित्त वर्ष 2022 में बेंचमार्क सूचकांकों में करीब 18 फीसदी की उछाल आई। वित्त वर्ष 22 में कमीशन हासिल करने के लिहाज से एनजे इंडियाइन्वेस्ट पहले पायदान पर बनी रही और उसने करीब 1,300 करोड़ रुपये सकल कमीशन के तौर पर हासिल किए। एसबीआई 735 करोड़ रु. कमीशन के साथ दूसरे और एचडीएफसी बैंक 581 करोड़ रु. के कमीशन के साथ तीसरे स्थान पर रहा। बैंक समर्थित वितरकों ने कुल कमीशन का 30 फीसदी व 10 अग्रणी वितरकों ने भी कुल का करीब 30 फीसदी प्राप्त किया।