कई दिनों से 82 के नीचे घूमकर लौट रहा रुपया आज उस पार ही जम गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत दरों में वृद्धि के संकेत मिलने से रुपये को झटका लगा। विभिन्न सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कुछ बैंकों को विदेशी बाजार में मार्केट पोजिशन कम करने को कहा है क्योंकि पिछले दो दिनों से उसी की वजह से रुपये में गिरावट बढ़ गई है।
रुपया आज 0.5 फीसदी गिरावट के साथ 82.33 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में इस साल अब तक 9.7 फीसदी की गिरावट आ गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने आज दरों में वृद्धि जारी रखने की बात दोहराई, जिससे रुपये को तगड़ा झटका लगा। सितंबर 2021 से ही रुपये में गिरावट जारी है। उस दौरान फेडरल रिजर्व ने अमेरिका में दरों में वृद्धि का चक्र उम्मीद से लंबा होने का संकेत दिया था। तब से अब तक रुपया 2.9 फीसदी लुढ़क चुका है।
विभिन्न सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि आरबीआई ने बैंकों को विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अपना रुख नरम करने के लिए कहा है। यह श्रेणी सीधे तौर पर केंद्रीय बैंक के विनियमन में नहीं आता है। विदेश में रुपये से संबंधित ज्यादातर गतिविधियां लंदन, सिंगापुर और न्यूयॉर्क में होती हैं।
इस बारे में जानकारी के लिए आरबीआई को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। दरों में वृद्धि के मोर्चे पर फेडरल रिवर्ज के आक्रामक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के कारण रुपये को विदेशी बाजार में तगड़ा झटका लगा है।
एक सूत्र ने कहा, ‘आरबीआई का कहना है कि जब भी वह पहल करता है और हाजिर बाजार में दखल देता है तो डॉलर की कीमत विदेशी बाजार के मुकाबले यहां ज्यादा गिर सकती है। तब बैंक यहां डॉलर खरीद लेंगे और ऊंचे दाम पर विदेश में बेच देंगे। इससे आरबीआई का दखल बेकार हो जाएगा।’ आरबीआई ने पिछले साल घरेलू बैंकों के जरिये विदेशी बाजार में हस्तक्षेप करना शुरू किया था।
बैंक ऑफ इंटरनैशनल सेटलमेंट के 2019 में कराए गए पिछले त्रिवार्षिक सर्वेक्षण के अनुसार विदेशी बाजार में रुपये की मात्रा घरेलू बाजार के मुकाबले बढ़ चुकी थी।