अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने के बाद आज रुपये में सुधार हुआ। डीलरों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से रुपये को सहारा मिला। रुपया 0.3 फीसदी मजबूती के साथ 82.75 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 83.29 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के ताजा निचले स्तर पर गिर गया था। बुधवार को रुपया 83.02 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर पर था।
मंगलवार के बाद रुपये में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट को देखते हुए आरबीआई ने विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए डॉलर की बिक्री करने का निर्णय लिया। डीलरों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने हाजिर बाजार में संभवत: 1 अरब डॉलर से अधिक की बिक्री की। बुधवार को आरबीआई ने कोई खास हस्तक्षेप नहीं किया था। इससे रुपये को कोई सहारा न मिला और वह 83 रुपये प्रति डॉलर के पार पहुंच गया।
कोटक सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (करेंसी डेरिवेटिव्स ऐंड इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स) अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘आरबीआई ने आज करीब 1 अरब डॉलर की बिक्री के साथ बाजार में हस्तक्षेप किया। मुख्य तौर पर इसी हस्तक्षेप के कारण रुपये सुधार हुआ। मैं समझता हूं कि निकट भविष्य में रुपया 82.50 से 83.50 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रहेगा।’
डीलरों ने कहा कि आरबीआई ने कारोबार के आखिरी समय में हस्तक्षेप किया जिससे रुपये के खिलाफ दांव लगाने वाले कारोबारी हतोत्साहित हुए।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज रिसर्च के विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और चीनी युआन में सुधार के कारण रुपया शुरुआती गिरावट से उबर गया। यह आज के व्यापार में एशिया में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रही।’ उन्होंने अनुमान जाहिर किया कि रुपया 81.90 से 83.50 रुपये प्रति डॉलर के व्यापक दायरे में रहेगा।
पिछले कुछ सप्ताह से आरबीआई ने हाजिर बाजार के मुकाबले मुद्रा बाजार के फॉरवर्ड श्रेणी में डॉलर की बिक्री के जरिये अपना हस्तक्षेप बढ़ा दिया है। विश्लेषकों ने कहा कि फॉरवर्ड श्रेणी में हस्तक्षेप करते हुए आरबीआई हेडलाइन रिजर्व के स्तर में तेजी से गिरावट को रोक रहा था। यह पहल आरबीआई के हेडलाइन रिजर्व में भारी गिरावट के मद्देनजर की गई है। फरवरी के अंत में यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद से आरबीआई के हेडलाइन रिजर्व में करीब 100 अरब डॉलर की गिरावट आई है।
अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल
आज के शुरुआती कारोबार के दौरान रुपये में गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि थी। फेडरल रिजर्व के कुछ सदस्यों द्वारा की गई टिप्पणी से अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा अगले महीने और उसके बाद दरों में आक्रामक वृद्धि की उम्मीद बढ़ गई।
अमेरिकी डॉलर सूचकांक गुरुवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे 112.86 पर था जबकि बुधवार को साढ़े तीन बजे यह 112.47 था। आमतौर पर अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह बढ़ता है। बनर्जी ने कहा, बाजार ने उम्मीद जताई है कि 2 नवंबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में 75 आधार अंकों की वृद्धि की जाएगी।