करीब 18 साल बाद टाटा समूह की कंपनी खुदरा निवेशकों को शेयर बिक्री की योजना बना रही है। टाटा मोटर्स की मुनाफे वाली इकाई टाटा टेक्नोलॉजिज की योजना मौजूदा वित्त वर्ष में अपने शेयर सूचीबद्ध कराने की है और कंपनी इस रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार में करेगी।
यह साल 2004 में पेश टीसीएस के आईपीओ के बाद पहला आईपीओ होगा। बैंकरों ने कहा कि कंपनी इस आईपीओ के प्रबंधन के लिए सिटीबैंक समेत कई बैंकों से बातचीत कर रही है। इस कंपनी में टाटा मोटर्स की हिस्सेदारी 74 फीसदी है। इस इश्यू का आकार कितना होगा और कंपनी कितनी हिस्सेदारी बेचेगी, इश पर अभी बात हो रही है।
एक बैंकर ने कहा, टाटा समूह करीब 25 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है, हालांकि शेयर बिक्री पर अंतिम फैसला तब लिया जाएगा जब बाजारों में सुधार देखने को मिलेगा।
अभी टाटा टेक्नोलॉजिज की करीब 40 फीसदी आय दो कैप्टिव ग्राहकों टाटा मोटर्स व जेएलआर से हासिल होती है, जिसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि यह कंपनी के लिए राजस्व संकेंद्रण का जोखिम पैदा करता है। बैंकरों ने कहा कि कंपनी को तीन औद्योगिक क्षेत्रों ऑटोमोटिव, एयरोस्पेस और इंडस्ट्रियल मशीनरी से आय अर्जित होती है, लेकिन ज्यादातर राजस्व ऑटोमोबाइल से हासिल होता है।
कंपनी के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 22 की नौ महीने की अवधि में कंपनी का राजस्व 2,648 करोड़ रुपये रहा और शुद्ध लाभ 330 करोड़ रुपये।
टाटा समूह के अधिकारियों ने आईपीओ की योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
कंपनी की शेयर बिक्री ऐसे समय में हो रही है जब कई अग्रणी कंपनियां अपनी असूचीबद्ध फर्मों को सूचीबद्ध कराने की योजना बना रही है ताकि होल्डिंग कंपनी की वैल्यू सामने आए। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी वायरलेस टेलिफोनी और खुदरा इकाई को सूचीबद्ध कराने की योजना बना रही है। इस संबंध में घोषणा शेयरधारकों की आगामी सालाना आम बैठक में होने की उम्मीद है।
2022 की पहली छमाही में 50 कंपनियों ने बाजार नियामक सेबी के पास विवरणिका का मसौदा जमा कराया है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ के लिए आवेदन की यह संख्या साल 2007 के बाद सबसे ज्यादा है।