Tax Rebates: क्या FY26 के आंकड़े टैक्स रियायतों पर नए सिरे से सोचने का संकेत हैं?
इस सप्ताह जारी वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति के अस्थायी आंकड़ों की सबसे प्रमुख बात स्वाभाविक रूप से राजकोषीय घाटे से संबंधित है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार पांचवे वर्ष राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर कायम रहने में सफल रही हैं। कुछ साल तो उन्होंने इसे बेहतर ही किया है। उनके […]
केवल बाहरी खतरा नहीं, भीतर भी दें ध्यान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को ध्यान में रखते हुए भारतीयों को मितव्ययिता संबंधी कई कदम उठाने की सलाह दी है। अब केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी रणनीतियां तैयार करनी होंगी जिनकी मदद से कच्चे तेल के बढ़े हुए दामों के कारण उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले राजकोषीय […]
नए स्वरूप में NITI Aayog और PMEAC भारत की अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर समझने में बन सकते हैं मददगार
अभी कुछ वर्ष पहले तक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी को उसके समय-समय पर दिए जाने वाले लाभ संबंधी अनुमान (प्रॉफिट गाइडेंस) के कुशल प्रबंधन के लिए जाना जाता था। सामान्यत: जब कंपनी अपने तिमाही नतीजे घोषित करती, तो आने वाली तिमाहियों के लिए लाभ वृद्धि का अनुमान प्रस्तुत करती। बाद में किए […]
संघर्ष के दौर में भारत के समक्ष चुनौतियां
इसमें दो राय नहीं कि पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका देगा। इसकी वजह तेल एवं गैस पर भारत की निर्भरता भर नहीं है बल्कि देश की राजकोषीय बाधाएं और भुगतान संतुलन के मोर्चे पर संवेदनशीलता भी इसका कारण है। जैसा कि कई अर्थशास्त्रियों और मीडिया रिपोर्टों ने भी संकेत किया […]
कोविड से सबक: पश्चिम एशिया संकट सुधारों का मौका भी बन सकता है
तमाम विशेषज्ञ और विश्लेषक पश्चिम एशिया की लड़ाई की तुलना कोविड महामारी से कर रहे हैं। सरकार ने भी संसद में कहा है कि इस संघर्ष के कारण उभरे चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात भारत पर गहरा असर डालेंगे। उन्होंने देश को इन हालात से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत पर भी बल दिया है। […]
आपदा में अवसर: तेल आयात पर निर्भरता घटाने के लिए तुरंत नीति बदलाव जरूरी
तेल संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना गंभीर है? भारत को मौजूदा हालात से क्या सबक लेना चाहिए, जब कीमतों में बढ़ोतरी और तेल-गैस की किल्लत ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भारत की पेट्रोलियम कंपनियों तथा सरकार की वित्तीय स्थिति पर तेल संकट […]
सरकार को भर्ती योजनाओं की योजना और क्रियान्वयन क्षमता बढ़ानी होगी
वर्ष 2024 के आम चुनाव और नई दिल्ली में सरकार के गठन के तुरंत बाद, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और उनके विभागों में रिक्त पदों को भरने और रोजगार प्रदान करने की आवश्यकता पर काफी चर्चा हुई। संभवतः यह सत्तारूढ़ पार्टी के इस आकलन के बाद हुआ कि रोजगार की कमी उसके कमतर चुनावी प्रदर्शन के […]
16वें वित्त आयोग से दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ी, परिसीमन में अड़चनें हो सकती हैं कम
सोलहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट गत एक फरवरी को 2026-27 के बजट की प्रस्तुति के साथ सार्वजनिक की गई थी। उसकी सिफारिशों के साथ व्यापक रूप से टिप्पणियां भी हैं। हालांकि इन टिप्पणियों में एक समान बात नजर आती है। इनसे संकेत मिलता है कि 16वें वित्त आयोग ने कुछ राज्यों की उस मांग को […]
पूंजीगत व्यय की गति और निगरानी की चुनौती
बीते कुछ वर्षों में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में हुए इजाफे का आकलन कई तरह से किया जा सकता है। ऐसा आकलन महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा वित्त वर्ष में रुझानों में काफी बदलाव आया है। वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय केवल 4.2 फीसदी बढ़ा जबकि इसके पिछले पांच सालों में हर […]
BS Exclusive: खास घटना नहीं व्यापक बुनियाद पर बना है बजट- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को व्यापार, निर्यात, विनिर्माण समेत समूची भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बहुत बड़ी घटना माना जा रहा है, जिसका देश पर बहुआयामी प्रभाव पड़ सकता है। मगर समझौते की घोषणा से एक दिन पहले केंद्रीय बजट पेश कर चुकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मानती हैं कि समझौता कुछ वक्त पहले हो जाता […]