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एशिया बना ऑटो इंडस्ट्री का नया किंग! चीन-भारत की बढ़त से यूरोप-अमेरिका पीछे

2025 में वैश्विक वाहन उद्योग की वृद्धि का नेतृत्व एशिया-प्रशांत ने किया, जहां उत्पादन और बिक्री दोनों में तेज बढ़त दर्ज हुई।

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सोहिनी दास   
Last Updated- April 29, 2026 | 9:50 AM IST

साल 2025 में वैश्विक स्तर पर वाहनों की वृद्धि दर कहीं ज्यादा रही तो कहीं कम। लेकिन इसमें एशिया-प्रशांत विस्तार के मुख्य संचालक के तौर पर उभरा है। यह कहना है इंटरनैशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ मोटर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स के अध्यक्ष शैलेश चंद्र का। बीजिंग मोटर शो के दौरान बातचीत में उन्होंने यह जानकारी दी।

हालांकि साल 2025 में वैश्विक वाहन उत्पादन 3.9 प्रतिशत बढ़कर 9.64 करोड़ हो गया और बिक्री 4.7 प्रतिशत बढ़कर 9.98 करोड़ तक पहुंच गई। लेकिन चंद्र ने इस बात पर जोर दिया कि यह रफ्तार हर जगह एक जैसी नहीं रही। एशिया-प्रशांत ने उत्पादन में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ इस तेजी का नेतृत्व किया जबकि यूरोप और अमेरिका में क्रमशः 0.8 प्रतिशत और 2.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इससे जाहिर होता है कि वैश्विक वृद्धि एक साथ होने वाले सुधार के बजाय ‘अलग-अलग’ थी।

एशिया-प्रशांत ने अब उद्योग के केंद्र के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। वैश्विक वाहन उत्पादन में इस क्षेत्र की 61 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है। इसमें चीन, जापान और भारत का बड़ा योगदान है। यह क्षेत्र मांग के मामले में भी आगे है, जहां वाहनों की बिक्री 7 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ रही है और विनिर्माण के सबसे बड़े हब और खपत के बाजार, दोनों ही तौर पर इसकी दोहरी भूमिका और मजबूत हो रही है।

चंद्र ने कहा, ‘वैश्विक वाहन उद्योग तकनीकी बदलावों, भू-राजनीतिक दबावों और अलग-अलग सरकारों की नीतियों के कारण नए सिरे से आकार ले रहा है।’ उन्होंने यह भी कहा कि विनिर्माता कुछ बाजारों में धीमी वृद्धि, अन्य बाजारों में कड़ी प्रतिस्पर्धा तथा व्यापारिक दबावों, आपूर्ति श्रृंखलाओं, खर्च उठाने की क्षमता, ऊर्जा की कीमतों और इलेक्ट्रिफिकेशन की रफ्तार से जुड़ी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

First Published : April 29, 2026 | 9:50 AM IST