म्युचुअल फंड

रिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझें

Vallum Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, SIP निवेश मजबूत बना हुआ है लेकिन निवेश का फ्लो प्रदर्शन के अनुरूप नहीं दिख रहा।

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आशुतोष ओझा   
Last Updated- June 17, 2026 | 3:25 PM IST

देश में म्युचुअल फंड निवेश का दायरा लगातार बढ़ रहा है। SIP के जरिए ताबड़तोड निवेश आ रहा है और निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। लेकिन मई 2026 के आंकड़ों ने एक दिलचस्प और चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। ऐसे फंड्स ​जिनमें सबसे बेहतर रिटर्न मिला, उनमें निवेश सबसे कम आया, जबकि अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले फंड्स में निवेशकों ने सबसे ज्यादा पैसे लगाए।

वैलम कैपिटल (Vallum Capital) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इक्विटी म्युचुअल फंड्स में लगातार 63वें महीने नेट इनफ्लो यानी शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। SIP कंट्रीब्यूशन 30,954 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर के करीब बना रहा। हालांकि, निवेशकों का इनफ्लो यह संकेत देता है कि रिटर्न और निवेश के बीच तालमेल बिलकुल बेमेल है। यहां एक सवाल उठ रहा है कि क्या भारतीय निवेशक सही फंड्स का चयन कर रहे हैं, या फिर SIP के ऑटोमैटिक निवेश पैटर्न की वजह से पैसा उन कैटेगरी में जा रहा है जो उस समय सबसे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर रहीं।

31 मई 2026 तक म्युचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 81.58 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इक्विटी म्युचुअल फंड्स में लगातार 63वें महीने भी नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। निवेश का यह सिलसिला विधानसभा चुनावों, ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव और वैश्विक कमोडिटी संकट जैसी चुनौतियों के बावजूद जारी रहा है।

वैलम कैपिटल की मंथली मैक्रो ग्रिड चार्टबुक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में SIP के जरिए 30,954 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो एक साल पहले की तुलना में 16 फीसदी ज्यादा है। वहीं, देश में सक्रिय SIP खातों की संख्या बढ़कर 9.64 करोड़ हो गई है।

रिटर्न और निवेश का बेमेल ग​णित

रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में घरेलू इक्विटी फंड्स में रिटर्न और निवेश के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। माइक्रो-कैप फंड्स ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5.7 फीसदी रिटर्न दिया। स्मॉल-कैप फंड्स ने 3.4 फीसदी रिटर्न दिया और इनमें 2,229 करोड़ रुपये का निवेश आया। मिड-कैप फंड्स ने 1.6 फीसदी रिटर्न दिया और 3,898 करोड़ रुपये जुटाए।

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इसके विपरीत, लार्ज-कैप फंड्स ने केवल 1.5 फीसदी रिटर्न दिया, जो सभी कैटेगरी में सबसे कम था, लेकिन इनमें 8,565 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह स्मॉल-कैप फंड्स की तुलना में लगभग चार गुना और मिड-कैप फंड्स से दोगुना से ज्यादा है। इसके अलावा, फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने 2.1 फीसदी रिटर्न के साथ 5,350 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया, जबकि लार्ज एंड मिड-कैप फंड्स ने 1.9 फीसदी रिटर्न पर 2,617 करोड़ रुपये जुटाए।

रिपोर्ट का कहना है कि यह निवेशकों की समझ की कमी नहीं बल्कि SIP निवेश के स्ट्रक्चर का असर है। ज्यादातर SIP निवेश ऑटोमैटिक रूप से लार्ज-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड्स में जाते रहते हैं, चाहे उस महीने बेहतर प्रदर्शन किसी और कैटेगरी ने किया हो।

कैटेगरी AUM (₹ करोड़) 1 माह रिटर्न (%) अप्रैल 2026 नेट फ्लो मई 2026 नेट फ्लो शुद्ध बदलाव
माइक्रो-कैप 2,352 5.7 0 0 0
स्मॉल-कैप 4,14,531 3.4 6,069 2,229 -3,840
मिड-कैप 4,61,382 1.6 6,426 3,898 -2,528
मल्टी-कैप 2,37,742 1.9 3,932 2,205 -1,727
लार्ज एंड मिड-कैप 3,41,491 1.9 4,463 2,617 -1,846
फ्लेक्सी-कैप 5,68,177 2.1 9,819 5,350 -4,469
लार्ज-कैप 10,50,440 1.5 17,765 8,565 -9,199

(नोट: एयूएम, नेट इनफ्लो और शुद्ध बदलाव करोड़ रुपये में। सोर्स: वेलम रिपोर्ट)

थीमैटिक फंड्स में बैंकिंग सबसे पसंदीदा

करीब 5.99 लाख करोड़ रुपये के थीमैटिक फंड मार्केट में मई के दौरान बैंकिंग एंड फाइनें​शियल सर्विसेज (BFSI) फंड्स सबसे आगे रहे। BFSI फंड्स ने 5.5 फीसदी रिटर्न दिया और इनमें 1,013 करोड़ रुपये का निवेश आया। PSU बैंक फंड्स ने 6.9 फीसदी रिटर्न के साथ 436 करोड़ रुपये जुटाए। प्राइवेट बैंक फंड्स ने 6.5 फीसदी रिटर्न पर 329 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया। दोनों कैटेगरी में कुल 765 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ।

दिलचस्प बात यह रही कि ब्रॉड-बॉस्केट बैंकिंग फंड्स ने भी 6.5 फीसदी रिटर्न दिया, लेकिन उनमें 421 करोड़ रुपये की निकासी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक अब ब्रॉडर एक्सपोजर के बजाय चुनिंदा बैंकिंग थीम पर दांव लगा रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि टेक्नोलॉजी फंड्स ने मई में 1.6 फीसदी रिटर्न दिया और इनमें 178 करोड़ रुपये का निवेश आया। अप्रैल में इसी कैटेगरी से 100 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। हालांकि, डिजिटल इंडिया थीम वाले फंड्स ने 2.3 फीसदी बेहतर रिटर्न दिया, लेकिन वहां से 101 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक टेक्नोलॉजी सेक्टर में इंडेक्स आधारित फंड्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

डिफेंस का जलवा बरकरार, रेलवे फंड्स कमजोर

कंजम्प्शन फंड्स ने मई में केवल 0.8 फीसदी रिटर्न दिया और इस कैटेगरी से 235 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ। सिर्फ कंजम्प्शन ब्रॉड फंड्स से ही 207 करोड़ रुपये निकाले गए। इस सेक्टर की किसी भी सब-कैटेगरी में पॉजिटिव इनफ्लो दर्ज नहीं हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिफेंस फंड्स में 156 करोड़ रुपये का निवेश आया और निवेशकों की रुचि बनी रही। वहीं, रेलवे फंड्स ने सबसे खराब प्रदर्शन किया और 7 फीसदी का नुकसान दर्ज किया। इस कैटेगरी में खरीदार लगभग नहीं के बराबर रहे।

करीब 5 लाख करोड़ रुपये के फैक्टर-आधारित फंड्स में मई के दौरान दिलचस्प रुझान देखने को मिला। मोमेंटम फंड्स ने 2.9 फीसदी का सबसे बेहतर रिटर्न दिया, लेकिन इनमें केवल 157 करोड़ रुपये का निवेश आया।

इसके मुकाबले ग्रोथ फंड्स में 766 करोड़ रुपये का निवेश आया। फोकस्ड फंड्स में 662 करोड़ रुपये और कॉन्ट्रा फंड्स में 421 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज हुआ। दूसरी ओर, क्वालिटी फंड्स ने -0.3 फीसदी रिटर्न दिया और इनमें से 28 करोड़ रुपये निकाले गए। लो-वोलैटिलिटी फंड्स से भी 122 करोड़ रुपये की निकासी हुई।

रिपोर्ट का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने डिफेंस स्ट्रैटेजी वाले फंड्स की बजाय ग्रोथ-आधारित फंड्स को प्राथमिकता दी।

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FII की बिकवाली के बीच DII का सहारा

मई में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 32,963 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इससे उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 82,165 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को मजबूती मिली। डेट फंड्स से 96,949 करोड़ रुपये की निकासी हुई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार यह तकनीकी वजहों से हुई, क्योंकि अप्रैल में वित्त वर्ष समाप्ति के आसपास रिकॉर्ड 2.47 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया था।

भारत में अब म्युचुअल फंड निवेशकों के कुल खाते बढ़कर 27.65 करोड़ हो गए हैं, जबकि छह साल पहले यह संख्या केवल 10.04 करोड़ थी। SIP के जरिए हर महीने लगभग 31,000 करोड़ रुपये का निवेश लगातार आ रहा है।

रिपोर्ट का नतीजा यह बताता है कि भारत में रिटेल निवेशकों की मजबूती पर अब कोई सवाल नहीं है। लेकिन मई 2026 के आंकड़े एक दिलचस्प बदलाव जरूर दिखा रहे है।

एक्सपर्ट से समझते हैं…

जोखिम और रिटर्न का संतुलन

बीपीएन फिनकैप के डायरेक्टर अमित कुमार ​निगम का कहना है कि यह सही है कि माइक्रो-कैप ने निवेश ज्यादा दिया लेकिन उसमें निवेश कम आया। लेकिन यह केवल ‘फेमिलियर ऑप्शन’ चुनने का मामला नहीं है, बल्कि जोखिम से बचने की एक तर्कसंगत स्ट्रैटेजी है।

उन्होंने कहा कि निवेशक बेहतर रिटर्न को नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं। वे जोखिम और रिटर्न के संतुलन को ध्यान में रखकर फैसला ले रहे हैं। माइक्रो-कैप फंड आमतौर पर पोर्टफोलियो का ‘सैटेलाइट’ हिस्सा माने जाते हैं, न कि ‘कोर’ निवेश। किसी एक महीने में 5.7% रिटर्न का ज्यादा महत्व नहीं है, अगर निवेशक के पास 7 साल या उससे ज्याद की निवेश अव​धि नहीं है।

उपयुक्त विकल्प बनाम अटकलबाजी

लार्ज-कैप फंड्स में कम निवेश और ज्यादा रिटर्न कहीं SIP का गलत कैटेगरी में इनफ्लो तो नहीं हो रहा? इस सवाल के जवाब में निगम कहते हैं, ऐसा बिलकुल नहीं है। SIP का पैसा लक्ष्य-आधारित और अनुशासित होता है, न कि केवल रिटर्न के पीछे भागने वाला। असल में यह एक हेल्दी निवेश व्यवहार है। मई 2026 के आंकड़े दिखाते हैं कि भारतीय निवेशक पहले की तुलना में ज्यादा परिपक्व हो रहे हैं। वे एक महीने के रिटर्न के आधार पर फैसले नहीं ले रहे, बल्कि अपने SIP निवेश अनुशासन को बनाए रख रहे हैं। बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए लार्ज-कैप फंड्स को प्राथमिकता देना एक पॉजिटिव संकेत है।

उनका कहना है कि असल अंतर ‘फेमिलियर ऑप्शन बनाम परफॉर्मेंस’ का नहीं, बल्कि यह उपयुक्त विकल्प बनाम अटकलबाजी से जुड़ा है। माइक्रो-कैप फंड्स ने मई में 5.7% रिटर्न दिया, लेकिन अगले ही तिमाही में इनमें 20% तक गिरावट भी आ सकती है। इसके मुकाबले, लार्ज-कैप फंड्स भले ही मई में केवल 1.5% बढ़े हों, लेकिन लंबी अवधि में अपेक्षाकृत कम रिस्क के साथ 12-14% सालाना रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

निवेश में अनुशासन ज्यादा जरूरी

निगम का कहना है कि बेहतर रणनीति लार्ज-कैप निवेश को छोड़ना नहीं, बल्कि लंबी अवधि (7 साल या ज्यादा) और हाई रिस्क लेने की क्षमता रखने वाले निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो में 10-20% हिस्सा मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स को देना हो सकता है। स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश सीमित करने के लिए AMC की ओर से उठाए गए कदम भी निवेशकों को अत्यधिक भीड़भाड़ वाले निवेश से बचाने का प्रयास हैं। कुल मिलाकर निवेश में अनुशासन, तात्कालिक उत्साह (डोपामाइन) से कहीं ज्यादा जरूरी है।

निवेशक कुछ अवसर गंवा रहे हैं?

इन आंकड़ों के बीच क्या कुछ निवेशक अवसर भी गंवा रहे हैं? इस बारे में निगम कहते हैं, हां, कुछ हद तक यह बात सही है। भारतीय निवेशक अभी भी मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में अपेक्षाकृत कम निवेश करते हैं। विकसित देशों की तुलना में भारत में मिड और स्मॉल-कैप फंड्स की हिस्सेदारी कम है। उदाहरण के लिए, अमेरिका की 401(k) रिटायरमेंट योजनाओं में लगभग 35% निवेश मिड और स्मॉल-कैप कैटेगरी में होता है। जबकि भारत के इक्विटी म्युचुअल फंड AUM में इनकी हिस्सेदारी केवल लगभग 18% है।

उनका कहना है, ‘FD + लार्ज-कैप + रियल एस्टेट’ वाली पारंपरिक सोच अब भी हावी है। टियर-1 शहरों से बाहर आज भी बड़ी संख्या में निवेशक फिक्स्ड डिपॉजिट, लार्ज-कैप फंड्स और रियल एस्टेट को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इस वजह से हाई ग्रोथ की संभावना वाले मिड और स्मॉल-कैप निवेशों में भागीदारी सीमित रहती है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि पैसा कहां जा रहा है, बल्कि यह भी है कि क्या निवेशकों का पोर्टफोलियो उनकी जोखिम क्षमता और लंबी अवधि के लक्ष्यों के मुताबिक बेहतर तरीके से डायवर्सिफाइड है।

 

(डिस्क्लेमर: यहां दिए गए विचार एक्सपर्ट या रिपोर्ट पर आधारित है। बिजनेस स्टैंडर्ड इससे सहमत होना जरूरी नहीं समझता है। म्युचुअल फंड में निवेश बाजार के जो​खिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श जरूर कर लें।)

First Published : June 17, 2026 | 3:22 PM IST