बीमा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते के कारण होर्मुज स्ट्रेट स्थायी तौर पर खुलता है और क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो समुद्री युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में नरमी आ सकती है। हालांकि भारत में समुद्री बीमा पूल (बीएमआईपी) के शुरू होने के बाद समुद्री युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम पहले से ही सामान्य होने लगे थे। अमेरिका और ईरान ने फरवरी के आखिर में शुरू हुए संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति जताई है।
उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आगाह किया है कि इस सकारात्मक घटनाक्रम के बावजूद बीमा कंपनियों द्वारा प्रीमियम में तत्काल कमी किए जाने की संभावना नहीं है। अब यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि इस समझौता ज्ञापन से उस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही में कितना सुधार होता है।
मगर यह अपेक्षित राहत ऐसे समय में मिलने वाली है जब बीएमआईपी ने पश्चिमी एशिया में संघर्ष के चरम पर जोखिम वाले माल ढुलाई के लिए युद्ध-जोखिम बीमा दरों को 60 से 80 फीसदी तक कम करने में मदद की है। बीमा ब्रोकरों के अनुसार, बीएमआईपी के शुरू होने से पहले पुनर्बीमाकर्ता फारस की खाड़ी से गुजरने वाले माल के लिए उसके मूल्य का 2 से 3 फीसदी तक युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम वसूल रहे थे।
प्रूडेंट इंश्योरेंस ब्रोकर्स के उपाध्यक्ष (समुद्री विशेषज्ञता) गौरव अग्रवाल ने कहा, ‘बीएमआईपी शुरू होने के साथ ही पूल समिति साप्ताहिक तौर पर युद्ध-जोखिम दरों की समीक्षा करती है और प्रतिभागी बीमाकर्ताओं को मार्गदर्शन जारी करती है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर 19 जून को हस्ताक्षर हो जाने और होर्मुज स्ट्रेट के जरिये जहाजों की आवाजाही सामान्य होने पर हम बीएमआईपी के तहत और अंतरराष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ताओं दोनों से युद्ध-जोखिम दरों में और कमी किए जाने की उम्मीद करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इस बीच युद्ध-जोखिम को छोड़कर माल के लिए दरों में नरमी है जो व्यापक बाजार के रुझान को दर्शाती है।’
जोखिम सलाहकार फर्म मार्श के वैश्विक प्रमुख (समुद्री, कार्गो और लॉजिस्टिक्स) मार्कस बेकर ने कहा, ‘कुछ समुद्री बीमाकर्ताओं ने स्वीकार किया है कि फारस या अरब की खाड़ी क्षेत्र में सप्ताहांत में स्थितियां सुधरी हैं। मगर लघु अवधि में कुल मिलाकर बाजार की प्रतिक्रिया आगे शांति बहाली की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करेगी।’ चार महीने के इस संघर्ष के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं ने या तो उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम बीमा कवर को वापस ले लिया था अथवा प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी थी।
बीमा लागत में वृद्धि ने सरकार को इस महीने की शुरुआत में 1.5 अरब डॉलर का सरकार द्वारा समर्थित बीएमआईपी को शुरू करने के लिए प्रेरित किया। राज्य के स्वामित्व वाली पुनर्बीमाकर्ता जीआईसी आरई द्वारा प्रशासित और घरेलू सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा समर्थित इस पूल की बट्टेखाते में डालने की क्षमता 935 करोड़ रुपये की है। साथ ही इसे भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारतीय शिपिंग और व्यापार के लिए युद्ध-जोखिम बीमा कवर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिहाज से डिजाइन किया गया था।
भारतीय बीमा ब्रोकर संघ (आईबीएआई) के विशेषज्ञ हरि राधाकृष्णन के अनुसार, बीमा कंपनियां अगले कुछ सप्ताह में स्थिति पर नजर रखते हुए इंतजार करने की रणनीति पर अमल कर सकती हैं क्योंकि दोबारा तनाव बढ़ने, परिचालन में बाधाएं आने या समझौते के उल्लंघन की आशंकाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।