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ऑटो सेक्टर की कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि इस दौरान कंपनियों की आमदनी में करीब 17 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इस ग्रोथ के पीछे पैसेंजर व्हीकल, दोपहिया और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में अच्छी मांग को मुख्य वजह माना जा रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक, इस अवधि में बिक्री में दो अंकों की वृद्धि देखने को मिल सकती है। इसका समर्थन बेहतर वहन क्षमता, जीएसटी दरों में कटौती से बढ़ी अफॉर्डेबिलिटी, आसान फाइनेंसिंग और त्योहारों के सीजन से मिला डिमांड सपोर्ट कर रहा है। इसके साथ ही कंपनियों को बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और कम डिस्काउंटिंग के चलते रियलाइजेशन में भी सुधार मिला है।
हालांकि, मुनाफे के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है। अनुमान है कि ऑटो कंपनियों का एबिट्डा (EBITDA) इस तिमाही में सालाना आधार पर लगभग 12 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। कुछ कंपनियों को ऑपरेटिंग लेवरेज और बेहतर स्केल का फायदा मिलेगा, साथ ही करेंसी का भी सपोर्ट देखा जा सकता है, जिससे लागत के दबाव कुछ हद तक संतुलित हो जाएंगे।
मार्जिन को लेकर बाजार में राय बंटी हुई है। कुछ ब्रोकरेज का मानना है कि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से मार्जिन में 50 से 70 बेसिस प्वाइंट तक हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी के चलते मार्जिन स्थिर रह सकते हैं या फिर करीब 20 बेसिस प्वाइंट तक की मामूली गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इससे साफ है कि मजबूत बिक्री के बावजूद लागत का दबाव कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकता है।
ब्रोकरेज हाउस की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4FY26) में ऑटो सेक्टर की मांग में मजबूत तेजी देखने को मिली है। हालांकि हर सेगमेंट में ग्रोथ के कारण अलग-अलग रहे, लेकिन कुल मिलाकर बिक्री में चौतरफा बढ़त दर्ज की गई है।
नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार दोपहिया वाहनों (2W) की बिक्री सालाना आधार पर करीब 25 प्रतिशत बढ़ी है। इसमें GST में कटौती के बाद बेहतर किफायती कीमतों और आसान फाइनेंसिंग की अहम भूमिका रही। इसी तरह एक्सपोर्ट्स में भी 25 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में घरेलू बिक्री में करीब 12 प्रतिशत की हल्की बढ़त रही, लेकिन एक्सपोर्ट्स ने 30 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग लगाई। इसमें बेहतर विदेशी मांग, करेंसी का फायदा और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार को वजह माना जा रहा है।
कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी करीब 20 प्रतिशत की सालाना बढ़त देखने को मिली। इसमें बेहतर माल ढुलाई गतिविधियों और आसान फाइनेंसिंग ने मांग को सपोर्ट किया।
ट्रैक्टर सेगमेंट इस तिमाही का सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जहां करीब 33 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज की गई। अच्छी रबी बुवाई और ग्रामीण इलाकों में सरकारी सपोर्ट उपायों का इसका बड़ा कारण माना जा रहा है।
इसी तरह मोतीलाल ओसवाल की चैनल जांच भी इसी रुझान की पुष्टि करती है। उनके मुताबिक पूरे उद्योग की बिक्री लगभग 23 प्रतिशत सालाना बढ़ी है। इसमें 2W में 25 प्रतिशत, PV में 15 प्रतिशत, CV में 22 प्रतिशत और ट्रैक्टर में 33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए आने वाला तिमाही मजबूत ग्रोथ का संकेत दे रहा है। ब्रोकरेज और रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक पैसेंजर व्हीकल (PV) और टू-व्हीलर सेगमेंट में कई बड़ी कंपनियां दमदार रेवेन्यू और मुनाफे की बढ़ोतरी दर्ज कर सकती हैं।
मारुति सुजुकी के लिए सबसे मजबूत अनुमान सामने आए हैं। कंपनी का रेवेन्यू करीब 28 प्रतिशत सालाना बढ़ने की उम्मीद है। वहीं Ebitda में भी अच्छी छलांग लग सकती है और मार्जिन 12.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसका कारण बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और डिस्काउंटिंग में कमी बताया जा रहा है।
टू-व्हीलर सेगमेंट में भी तेज बढ़त की उम्मीद है। बजाज ऑटो का रेवेन्यू लगभग 29 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जबकि Ebitda ग्रोथ 30 से 35 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। टीवीएस मोटर के लिए भी मजबूत प्रदर्शन का अनुमान है और इसका रेवेन्यू करीब 32 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिसमें घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों बाजारों का योगदान रहेगा। हीरो मोटोकॉर्प का रेवेन्यू मिड-20 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है, हालांकि मार्जिन में ज्यादा सुधार सीमित रह सकता है।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। मारुति और महिंद्रा एंड महिंद्रा मजबूत डबल डिजिट ग्रोथ दिखा सकती हैं। महिंद्रा के मुनाफे में करीब 33 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी का अनुमान है।
इसके उलट हुंडई मोटर इंडिया के लिए समय थोड़ा कमजोर रह सकता है। कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ मिड सिंगल डिजिट यानी करीब 6 से 7 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही Ebitda में 20 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट का अनुमान है, जिसका कारण कच्चे माल की लागत, मार्केटिंग खर्च और नई फैक्ट्री से जुड़े खर्च बताए जा रहे हैं।
टाटा मोटर्स की पैसेंजर व्हीकल यूनिट में मजबूत 53 प्रतिशत रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन इसकी लग्जरी यूनिट जेएलआर में कमजोरी दिख सकती है। टैरिफ, ज्यादा खर्च और कम मांग के चलते मार्जिन में करीब 500 बेसिस प्वाइंट तक की गिरावट आ सकती है, जिससे कुल मुनाफे पर दबाव बने रहने की संभावना है।
टाटा मोटर्स की कमर्शियल व्हीकल (CV) यूनिट और अशोक लेलैंड को आने वाले समय में मजबूत ग्रोथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक दोनों कंपनियों की कमाई में करीब 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका बड़ा कारण बेहतर बिक्री और मजबूत डिमांड माना जा रहा है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि पूरे ऑटो OEM सेक्टर की आय सालाना आधार पर लगभग 17 से 19 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। वहीं EBITDA यानी ऑपरेटिंग मुनाफा करीब 26 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। इसमें ऑपरेटिंग लेवरेज और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स का अहम योगदान रहेगा।
हालांकि, लागत को लेकर तस्वीर थोड़ी चुनौतीपूर्ण दिख रही है। मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चौथी तिमाही में इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। इसका पूरा असर तुरंत नहीं दिखेगा और इसका दबाव वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ज्यादा सामने आ सकता है, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट्स में देरी से एडजस्टमेंट होता है।
इसी वजह से OEM कंपनियों, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल को छोड़कर, के EBITDA मार्जिन में हल्की गिरावट देखने की संभावना है। अनुमान है कि मार्जिन करीब 20 बेसिस प्वाइंट घटकर लगभग 14.1 प्रतिशत रह सकता है। मजबूत बिक्री के बावजूद बढ़ती लागत मुनाफे पर दबाव बना रही है।
कोटक का यह भी कहना है कि कीमती और बेस मेटल्स की ऊंची कीमतों से ग्रॉस मार्जिन पर दबाव बना रहेगा। हालांकि बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और बढ़े हुए स्केल की वजह से EBITDA मार्जिन में मामूली सुधार भी देखने को मिल सकता है।
ऑटो सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए आउटलुक मिला-जुला नजर आ रहा है, हालांकि ऑटो एंसिलरी (स्पेयर पार्ट्स और कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियां) फिलहाल बेहतर स्थिति में हैं।
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal का अनुमान है कि इन कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ करीब 14 प्रतिशत रह सकती है, जबकि Ebitda (ऑपरेटिंग मुनाफा) में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं Centrum का अनुमान इससे भी ज्यादा उत्साहित है। उसके मुताबिक Ebitda ग्रोथ करीब 40.7 प्रतिशत तक जा सकती है, जिसका कारण बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज और प्रोडक्ट मिक्स में सुधार बताया गया है।
टायर कंपनियों और कुछ चुनिंदा कंपोनेंट निर्माताओं को भी मार्जिन में सुधार का फायदा मिला है। इसका एक बड़ा कारण पिछली तिमाहियों का कम आधार और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कच्चे माल की कीमतें, खासकर रबर और क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से यह फायदा Q1 FY27 के बाद कम हो सकता है।
कुल मिलाकर, Q4 FY26 ऑटो सेक्टर के लिए मजबूत तिमाही मानी जा रही है, जहां डबल डिजिट में रेवेन्यू और Ebitda ग्रोथ देखने को मिल सकती है। लेकिन ब्रोकरेज का कहना है कि मार्जिन में जो तेजी अभी दिख रही है, वह अपने पीक के करीब पहुंच चुकी है। आने वाले समय में कच्चे माल की महंगाई, बढ़ती फ्रेट कॉस्ट और भू-राजनीतिक जोखिम कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकते हैं।