साल 2026-27 के इस बजट पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, क्योंकि इसे वैश्विक अस्थिरता और व्यापारिक तनाव के बीच पेश किया गया है
Budget 2026 Highlights: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में अपना लगातार नौवां बजट पेश कर दिया है। यह भाजपा-नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा बजट था, जिसे वैश्विक अनिश्चितताओं और निर्यात में सुस्ती के बीच पेश किया गया। यह बजट अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक के वित्त वर्ष के लिए है। साल 2026-27 के इस बजट पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, क्योंकि इसे वैश्विक अस्थिरता और व्यापारिक तनाव के बीच पेश किया गया है। खास तौर पर पिछले साल अमेरिकी टैरिफ में हुई बढ़ोतरी से प्रभावित भारतीय निर्यातक इस बजट से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे थे। 29 जनवरी को पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था, जिसे आधार बनाकर वित्त मंत्री ने एक मजबूत और विकसित भारत का रोडमैप तैयार किया है।
टैक्सपेयर्स को राहत और नियम: वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आयात (Personal Imports) पर लगने वाले टैरिफ को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, विदेश में संपत्ति के खुलासे के लिए 6 महीने की एक विशेष योजना शुरू की जाएगी। ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की आखिरी तारीख पहले की तरह 31 जुलाई ही रहेगी।
शिक्षा और चिकित्सा पर छूट: पढ़ाई और इलाज के लिए विदेश पैसे भेजने पर लगने वाले टीसीएस (TCS) को 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत को तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0’ को लॉन्च करने का ऐलान किया गया है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं।
क्लाउड सर्विस और डेटा सेंटर: विदेशी क्लाउड कंपनियों को लुभाने के लिए सरकार ने 2047 तक ‘टैक्स हॉलिडे’ का प्रस्ताव दिया है। शर्त यह है कि इन कंपनियों को भारतीय ग्राहकों को अपनी सेवाएं किसी भारतीय रीसेलर के जरिए देनी होंगी।
एमएसएमई (MSME) सेक्टर: छोटे उद्योगों को ‘चैंपियन’ बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का ‘SME ग्रोथ फंड’ बनाने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही ‘सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड’ में 2,000 करोड़ रुपये और डाले जाएंगे।
स्वास्थ्य और रोजगार: सरकार ने अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख केयर गिवर्स और 1 लाख अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (जैसे रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ऑप्टोमेट्री एक्सपर्ट्स) तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च: पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। 2014-15 में यह महज 2 लाख करोड़ रुपये था।
राजकोषीय गणित: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) जीडीपी का 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है। साथ ही, राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी को 41 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
ग्रीन एनर्जी और बायो-फार्मा: स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों में प्रदूषण कम करने के लिए 20,000 करोड़ रुपये की ‘कार्बन कैप्चर’ योजना शुरू होगी। वहीं, दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘बायो फार्मा शक्ति’ मिशन का ऐलान किया गया है।
खनिज गलियारे: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में खास ‘दुर्लभ खनिज गलियारे’ (Rare Earth Mineral Corridors) स्थापित किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में साफ किया कि सरकार का ध्यान तीन मुख्य चीजों पर हैं जो आर्थिक विकास को गति देना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और हर परिवार तक संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
Sahi के को-फाउंडर और CEO डेल वाज का कहते हैं कि केंद्रीय बजट से यह साफ नजर आता है कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर पूरा फोकस कर रही है। बायोफार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ, केमिकल, मशीनरी और टेक्सटाइल जैसे अहम सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे देश में उत्पादन बढ़ेगा, एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए रोजगार के नए मौके बनेंगे।
वाज का मानना है विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारतीय शेयर बाजार में निवेश की अनुमति देना और निवेश की सीमा बढ़ाना एक सही कदम है। इससे ज्यादा लोग बाजार से जुड़ेंगे, निवेश बढ़ेगा और भारत का शेयर बाजार और मजबूत होगा।