facebookmetapixel
test postQ4 में टूटेंगे सारे रिकॉर्ड! हिंदुस्तान जिंक के CEO का दावा: चौथी तिमाही होगी सबसे मजबूतरेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइल

एमसीएक्स के छह नए कोल्ड स्टोरेज

Last Updated- December 05, 2022 | 4:27 PM IST

आलू के वायदा कारोबार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) ने अपने कोल्ड स्टोरेजों की संख्या में इजाफा किया है। पश्चिम बंगाल में कोल्ड स्टोरेजों की संख्या पहले 6 थी, जो बढ़कर इस साल 12 हो गई है।
कंपनी इन्हें डिलीवरी सेंटर के नाम से संबोधित करती रही है। कंपनी अब हुगली समेत बाकुड़ा, वर्धमान और मेदिनीपुर से भी कोल्ड स्टोरेजों का संचालन करेगी। नए स्टोरेजों को पहले से मौजूद स्टोरेजों के मालिकों को ही फ्रैंचाइजी समझौते के तहत संचालित करने को कहा जाएगा। यानी की एमसीएक्स के पास इन स्टोरेजों का मालिकाना हक नहीं होगा।
गौरतलब है कि इन कोल्ड स्टोरेजों की धारण क्षमता 3 से 5 लाख बोरों की है और प्रत्येक बोरे में 50 किलो आलू रखा जा सकता है। इस वक्त एमसीएक्स के जरिए औसतन 10 करोड़ रुपये के आलू का कारोबार किया जा रहा है।
कंपनी अपने कारोबार से किसानों को भी फायदा पहुंचाना चाहती है। लिहाजा, वह किसानों को प्रशिक्षण भी मुहैया कराती है। इस साल उसने तकरीबन 27 किसान के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए हैं।
इन कार्यक्र्रमों को उन क्षेत्रों में संचालित किया गया, जहां कंपनी के  डिलिवरी सेंटर पहले से मौजूद हैं।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में इस बार आलू का कारोबार कुल 3 हजार करोड़ रुपये का रहा, लेकिन इस कारोबार में ज्यादा हिस्सेदारी व्यापारियों और कोल्ड स्टोरेजों के मालिकों की रही। किसान अपनी सीमित पहुंच और पारंपरिक आपूर्ति व्यवस्था के चलते अपनी हिस्सेदारी दर्ज करने में नाकाम रहे।
उनकी मार्केटिंग भी दमदार नहीं होने के कारण किसान एक्सचेंज के जरिए कारोबार का फायदा भी नहीं उठा पाते। 

First Published - March 6, 2008 | 7:51 AM IST

संबंधित पोस्ट