तेल-गैस

रूसी तेल पर अमेरिका की 30 दिनों की मोहलत से समुद्र में फंसे क्रूड ऑयल को भारत लाने का रास्ता साफ

अमेरिका से मिली राहत के बीच भारत रूस से फंसा हुआ तेल मंगाने और होर्मुज संकट से बचने के लिए ऑस्ट्रेलिया-कनाडा जैसे नए ऊर्जा स्रोत तलाश रहा है

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- March 08, 2026 | 10:21 PM IST

भारत को रूसी तेल के आयात के लिए अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की छूट में रूस की सरकारी कंपनी रोसनेफ्ट और लुकऑयल से सीधे तौर पर कच्चे तेल की खरीदारी भी शामिल हैं। सरकारी अ​धिकारियों ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा कि रूसी तेल समुद्र में फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि देश अब तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और एलपीजी के नए स्रोतों की भी तलाश कर रहा है ताकि होर्मुज स्ट्रेट के जरिये आपूर्ति से बचा जा सके।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ईंधन का आयात होर्मुज से इतर अन्य सभी मार्गों से हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश की ईंधन जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने आज एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा, ‘इस संबंध में चिंता या अटकलों की कोई गुंजाइश नहीं है।’

प​श्चिम ए​शिया में जारी संघर्ष के बीच भारत अपने पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से ईंधन की आपूर्ति सुनि​श्चित करने की को​शिश कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारतीय कंपनियों ने नवंबर 2025 से रूस की दो कंपनियों से कच्चे तेल की खरीद करने से भी परहेज किया है।  अधिकारियों ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि प​श्चिम एशिया से आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत एलएनजी और एलपीजी आपूर्ति के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है। 

एलएनजी के लिए भारत अन्य देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया और कनाडा से आपूर्ति पर विचार कर रहा है। एलपीजी आपूर्ति के लिए टोटाल एनर्जीज, एक्सॉनमोबिल जैसी तमाम वैश्विक ऊर्जा दिग्गजों के साथ बातचीत की जा रही है। इस बीच आज अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान के समीप ईंधन डिपो पर हमला किया। यह संघर्ष अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है और आगे नरमी के संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। 

रूसी तेल की खरीद पर अमेरिकी मोहलत से भारतीय रिफाइनरों को समुद्र में फंसा रूसी कच्चा तेल हासिल करने में मदद मिलेगी। यह छूट 4 अप्रैल, 2026 को खत्म हो जाएगी।

भारत को कच्चे तेल के मुकाबले एलएनजी और एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान के प्रति अधिक संवेदनशील है। भारत करीब 83 फीसदी एलपीजी आयात और 56 फीसदी एलएनजी का आयात होर्मुज मार्ग से करता है। जहां तक कच्चे तेल का सवाल है तो भारत को इस मार्ग से करीब 40 फीसदी आपूर्ति होती है।

भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण एलपीजी की कीमतों में 60 रुपये प्रति सिलिंडर की वृद्धि की है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडर की कीमत अब 913 रुपये हो गई है। दिल्ली में वा​णि​ज्यिक उपयोग वाले 19 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडर की कीमत 114.5 रुपये बढ़ाकर 1,883 रुपये कर दी गई है।

सरकार ने रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया है कि एलपीजी का उत्पादन अ​धिकतम किया जाए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 33 करोड़ सक्रिय एलपीजी ग्राहक हैं। 

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि होने के आसार नहीं हैं क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियां वित्तीय प्रभाव को अवशोषित करने में समर्थ हैं। 

First Published : March 8, 2026 | 10:20 PM IST