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भारत को अमेरिका से मिली बड़ी राहत: रूस से कच्चा तेल खरीदने की मिली छूट, सप्लाई की चिंता खत्म

अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की ऐतिहासिक छूट दी है। हॉर्मुज संकट के बीच इस फैसले से भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिलेगी

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शुभांगी माथुर   
Last Updated- April 20, 2026 | 2:25 AM IST

अमेरिका ने अपनी नीति में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए भारत सहित कई देशों को रूस से कच्चा तेल की खरीद जारी रखने की अनुमति दे दी। इससे भारत को बड़ी राहत मिली है क्योंकि इससे कच्चे तेल की आपूर्ति से संबंधित चिंता दूर होगी। रूसी तेल खरीद की छूट की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बावजूद हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन बाधित है। उद्योग विशेषज्ञों और रिफाइनरी अधिकारियों के अनुसार यह नई छूट भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति को आसान बनाएगी।

इक्रा में कॉरपोरेट रेटिंग्स में उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘यह छूट भारत के लिए बड़ी राहत है क्योंकि इससे हमारी (कच्चे तेल की) आपूर्ति आसान हो जाएगी। संकट के बावजूद हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और इसमें रूस के तेल की आपूर्ति की भूमिका बहुत अहम है।’

अमेरिका ने वि​भिन्न देशों को 16 मई तक रूस से उन कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति है, जिन्हें 17 अप्रैल या उससे पहले जहाजों पर लाद दिया गया था। यह घोषणा अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट के दो दिन पहले दिए गए उस बयान के बिल्कुल उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंधों में दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

भारतीय रिफाइनरियां अमेरिकी छूट के नवीनीकरण के बिना भी रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखने को लेकर आश्वस्त थीं क्योंकि ये प्रतिबंध केवल प्रतिबंधित तेल कंपनियों पर ही लागू होते हैं।

एक रिफाइनरी के एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘हमें रूस से (कच्चा तेल) खरीदने से कभी नहीं रोका गया। मार्च में भी वह हमारा सबसे बड़ा आपर्तिकर्ता था। चूंकि होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने की स्थिति अभी भी साफ नहीं है। इसलिए हम अभी भी रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, अमेरिका और सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों से कच्चा तेल खरीदने पर ही निर्भर हैं। इराक, कुवैत और कतर जैसे जमीन से घिरे देशों से आपूर्ति लगभग शून्य है।’

मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म कैप्लर के आंकड़ों के अनुसार मार्च में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 9 महीने के उच्च स्तर 20.6 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया, जो फरवरी में 10.6 लाख बैरल प्रति दिन था। 17 अप्रैल तक रिफाइनरियों ने 16.7 लाख बैरल प्रति दिन रूसी तेल का आयात किया है।

इस बीच, ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए इसी तरह की छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो गई।

हॉर्मुज स्ट्रेट का खुलना अनिश्चित बना हुआ है। 19 अप्रैल को दो भारतीय ध्वज वाले पोत वीएलसीसी समर हेरल्ड और बल्क पोत जग अर्णव ने इस संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरते समय गोला बारी की घटना की सूचना दी, जिसके बाद वे फारस की खाड़ी लौट गए। हालांकि सरकार ने चालक दल के किसी भी चोटिल होने से इनकार किया।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली से मुलाकात की और गोलाबारी की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की।

सरकार ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘व्यापारिक जहाजों पर गोलाबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए विदेश सचिव ने राजदूत से ईरान के अधिकारियों को भारत के विचारों से अवगत कराने और हॉर्मुज से भारत की ओर जाने वाले जहाजों की सुविधा की प्रक्रिया को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने का आग्रह किया।’

इस बीच 31 भारतीय नाविकों के साथ एक भारतीय-ध्वज वाला कच्चा तेल टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को हॉर्मुज को सुरक्षित पार कर गया। जहाज के 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें घरेलू पीएनजी और सीएनजी परिवहन को 100 फीसदी आपूर्ति की गई है और उर्वरक संयंत्रों को गैस आवंटन उनके छह महीने के औसत उपभोग का लगभग 95 फीसदी तक बढ़ाया गया है। इसके अतिरिक्त शहरी गैस वितरण नेटवर्क के माध्यम से की जाने वाली आपूर्ति सहित अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को गैस आपूर्ति 80 फीसदी तक बढ़ाई गई है।

First Published : April 20, 2026 | 2:25 AM IST