प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के कारण भारत को पश्चिम एशिया से शिपमेंट लाने में कठिनाई हो रही है, इसलिए तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से अलग दूसरे रास्ते अपनाए जा रहे हैं। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
युद्ध शुरू होने के बाद से भारत में ऊर्जा आपूर्ति, खास तौर से एलपीजी और एलएनजी की कमी हो गई है। इसलिए सरकार ने घरेलू गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कमर्शल और इंडस्ट्रियल में कटौती करने का फैसला लिया है। अधिकारी ने आपूर्तिकर्ताओं का विवरण दिए बिना कहा, ‘एलपीजी और एलएनजी दोनों की शिपमेंट जल्द ही भारत पहुंचने की संभावना है।’ इसके अलावा सरकार ने तेल कंपनियों को खाना पकाने की गैस उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब रिफाइनरियों ने एलपीजी के घरेलू उत्पादन में 10 फीसदी की वृद्धि कर दी है।
सरकार ने बीते 5 मार्च को देश की सभी तेल कंपनियों को खाना पकाने की गैस के लिए अपनी रिफाइनरियों में एलपीजी का अधिक से अधिक उत्पादन करने का निर्देश दिया था। होर्मुज स्ट्रेट बंद हो जाने से एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति में व्यवधान पैदा हो गया है, जिसका भारत पर बहुत अधिक असर पड़ा है, क्योंकि इसके आयात का अधिकांश हिस्सा इसी मार्ग से आता है। यह बेहद महत्त्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है, जिस पर पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से हमला हो रहा है। ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है।
गैस की कमी को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने को प्राथमिकता दी है, ताकि आम लोगों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार के इस कदम से रेस्तरां और होटलों सहित कमर्शल प्रतिष्ठानों में खाना पकाने की गैस की किल्लत होने लगी है। इस मोर्चे पर हालात से निपटने के लिए सरकार सक्रिय हो गई है और उसने मंगलवार को तीन सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारियों के साथ रेस्तरां, होटलों और अन्य उद्योगों को एलपीजी आवंटन की समीक्षा करने के लिए समिति का गठन कर दिया है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि जो एलपीजी आयात की जा रही है, उसके आवंटन में गैर-घरेलू श्रेणी में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारी ने बताया कि भारतीय तेल कंपनियों ने पिछले दस दिनों के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से अलग दूसरे मार्गों से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ा दी है। युद्ध शुरू होने से पहले कुल ईंधन आयात का 55 फीसदी दूसरे रास्तों से आता था, लेकिन अब यह लगभग 70 फीसदी तेल आयात दूसरे रास्तों से हो रहा है। अधिकारी ने कहा, ‘हाल के दिनों में कच्चे तेल के स्टॉक में सुधार हुआ है, क्योंकि कंपनियों ने गैर-होर्मुज मार्गों से आपूर्ति बढ़ा दी है।’ उन्होंने कहा कि पूरे देश में सभी खुदरा केंद्रों पर तेल पहुंच रहा है और रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।
एक सरकारी अधिकारी ने 3 मार्च को बताया था कि भारत के पास 25 दिनों का कच्चे तेल और 25 दिनों का डीजल एवं पेट्रोल भंडार मौजूदा है। उसके बाद से भारत के तेल भंडार पर कोई ताजा जानकारी उपलब्ध नहीं हुई। पश्चिम एशिया युद्ध छिड़ने के बाद से भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में काफी वृद्धि की है। अमेरिकी अधिकारियों ने ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की छूट दे दी है। यह अवधि 4 अप्रैल को समाप्त होगी।