तेल-गैस

तेल कंपनियों पर संकट: LPG पर ₹80,000 करोड़ तक का घाटा संभव

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी लागत, पेट्रोल-डीजल और उर्वरक सेक्टर पर भी असर

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- April 30, 2026 | 9:14 AM IST

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को कहा कि यदि वर्तमान घाटे का स्तर पूरे वित्त वर्ष 2026-27 तक बना रहा, तो सरकारी तेल विपणन कंपनियों को एलपीजी की बिक्री पर लगभग 80,000 करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, ‘पश्चिम एशिया से एलपीजी आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। रिफाइनिंग कंपनियों द्वारा एलपीजी उत्पादन बढ़ाए जाने और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि से कार्गो प्राप्त किए जाने के बावजूद घरेलू स्तर पर एलपीजी की बिक्री पर विपणन कंपनियों का घाटा अभी भी ऊंचा बना हुआ है।’

इक्रा ने कहा कि सरकार विपणन कंपिनयों को 120-125 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमतों और क्रैक स्प्रेड के दीर्घकालिक औसत पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर क्रमशः 14 रुपये प्रति लीटर और 18 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होने का अनुमान है।

एजेंसी ने कहा कि कच्चे माल की लागत के दबाव के साथ-साथ आपूर्ति की बाधाएं, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, तेल विपणन, उर्वरक, रसायन और सिटी गैस वितरण (सीजीडी) जैसे प्रमुख डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों की लाभप्रदता को वित्त वर्ष 27 में प्रभावित कर सकती हैं।

उर्वरक क्षेत्र भी सल्फर और अमोनिया की कीमतों में वृद्धि से महत्वपूर्ण लागत दबाव का सामना कर रहा है, जो अन्य कच्चे माल और तैयार उत्पादों में भी परिलक्षित होता है। यूरिया और गैर-यूरिया उर्वरक दोनों खंडों के लिए कच्चे माल की कीमतों में तेज मुद्रास्फीति के साथ, इक्रा वित्त वर्ष 27 के लिए सब्सिडी की आवश्यकता 2.05 ट्रिलियन रुपये से 2.25 ट्रिलियन रुपये के बीच होने का अनुमान लगाता है, जिसमें ऊपर की ओर झुकाव है।

इक्रा ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार (जीओआई) इस क्षेत्र के लिए एक स्थिर क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखने के लिए, वित्त वर्ष 27 के दौरान उर्वरक सब्सिडी के लिए आवंटन को 1.71 ट्रिलियन रुपये के बजट से बढ़ाएगी।’

सीजीडी क्षेत्र मुद्रा में गिरावट और बढ़ती गैस की कीमतों के बीच बढ़ती लागत दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इक्रा को उम्मीद है कि सीजीडी संस्थाओं के लिए घरेलू पीएनजी पर लाभप्रदता स्थिर बनी रहेगी क्योंकि मांग को एडमिनिस्टर्ड प्राइस मैकेनिज्म (एपीएमसी) गैस के तरजीही आवंटन के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। लेकिन, सीएनजी (कम्प्रेस्ड नैचुरल गैस) सेगमेंट के लिए उपभोक्ताओं पर पूरी तरह पारित नहीं होने वाली बढ़ी हुई गैस लागत और मुद्रा में गिरावट के कारण मार्जिन पर दबाव पड़ने की उम्मीद है।

होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का 20 प्रतिशत और विभिन्न उर्वरकों और रसायनों की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। इक्रा ने कहा कि इस व्यवधान से सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों में लागत दबाव पड़ा है।

 

First Published : April 30, 2026 | 9:14 AM IST