प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्र का संचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 50 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल खरीदा है। कंपनी ने यह खरीद, अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान के तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाए जाने के बाद की है। इस सौदे की जानकारी मंगलवार को तीन सूत्रों ने दी।
दो सूत्रों ने बताया कि भारतीय रिफाइनरी कंपनी ने यह तेल नैशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (एनआईओसी) से खरीदी। एक सूत्र के अनुसार, यह तेल लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल की प्रीमियम कीमत पर खरीदा गया है, जो आईसीई ब्रेंट फ्यूचर्स से ज्यादा था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस तेल की डिलीवरी कब होगी।
हाल के वर्षों में मुख्य रूप से चीन के स्वतंत्र रिफाइनर ईरानी तेल खरीदते रहे हैं जिसे अक्सर दूसरे देशों के नाम की ब्राडिंग के साथ बेचा जाता है। रिलायंस ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया और एनआईओसी से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
यह सौदा अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए 30 दिन के प्रतिबंधों से छूट के बाद हुआ है, जिसके तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरान के तेल की खरीद की अनुमति दी गई है। यह छूट उन जहाजों पर लदे हुई तेल की खेप पर लागू होती है, जो 20 मार्च से पहले लादी गई हो और 19 अप्रैल तक उतार ली जाए।
भारत ने मई 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था और उस वक्त के बाद से यह देश द्वारा ईरान के तेल की पहली खरीद है। यह खरीदारी उस समय हुई है जब भारतीय रिफाइनरों ने रूस से 4 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल खरीदा क्योंकि अमेरिका ने इस महीने अस्थायी रूप से प्रतिबंधों से छूट दी थी ताकि आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों का समाधान निकाला जाए।
एशियाई क्षेत्र के कुछ अन्य रिफाइनर में देश की सरकारी रिफाइनिंग कंपनियां भी यह देख रही हैं कि क्या वे भी ईरान के तेल की खरीद कर सकती हैं। हालांकि, एशिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी साइनोपेक ने सोमवार को कहा कि उनका ईरान से तेल खरीदने का कोई इरादा नहीं है।