रियल एस्टेट क्षेत्र ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बेंचमार्क रीपो दर को 5.25 प्रतिशत के स्तर पर बरकरार रखने के फैसले का स्वागत किया है। उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीतिगत निरंतरता से मकान खरीदारों को विश्वास बना रहेगा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आवासीय तथा वाणिज्यिक दोनों ही श्रेणियों में मांग को मदद मिलेगी।
उद्योग के हितधारकों ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) के यथास्थिति बनाए रखने के रुख से उधारी लागत के बारे में पूर्वानुमान लगाने की क्षमता मिलेगी, खासतौर पर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की अस्थिर कीमतों का व्यापक आर्थिक परिदृश्य पर साया मंडरा रहा है।
सीबीआरई में चेयरमैन और मुख्य कार्य अधिकारी (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा कि यह निर्णय घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाता है और रियल एस्टेट की मांग की रफ्तार का समर्थन करता है।
उन्होंने कहा, ‘स्थिर रीपो दर समान मासिक किस्तों (ईएमआई) को अनुमान और प्रबंधन करने की क्षमता में रखकर मकान खरीदारों के मनोबल को लगातार मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति में नरमी से उपभोक्ताओं की खरीद शक्ति और मजबूत हो सकती है तथा आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट श्रेणियों में स्थायी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।
इसी तरह की राय दोहराते हुए नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि यह फैसला वैश्विक अनिश्चितता के समय स्थिरता मजबूत करता है और मकान खरीदारों के लिए खर्च उठाने की क्षमता में मदद करता है।
उन्होंने कहा, ‘वित्त की लागत स्थिर रहने से संभावित खरीदार मकान खरीदने जैसे दीर्घकालिक निवेशों का आकलन करने और प्रतिबद्ध होने के मामले में बेहतर स्थिति में हैं।’ उन्होंने कहा कि दर में अस्थिरता न होने से डेवलपरों को परियोजनाओं के प्रस्ताव बनाने में अधिक भरोसा मिलता है।
यह घोषणा ऐसे समय की गई है, जब कैलेंडर वर्ष 26 की पहली तिमाही में देश के आवासीय रियल एस्टेट बाजार में नरमी के संकेत दिखे थे और नाइट फ्रैंक के अनुसार बिक्री पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत घटकर 84,827 रह गई थी। इसके विपरीत ऑफिस लीजिंग सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 2.99 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई।