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भारत के पुनर्बीमा बाजार में रिकॉर्ड नरमी, प्रॉपर्टी प्रीमियम 85-90% तक घटा

भारत के 3 लाख करोड़ रुपये के गैर जीवन बीमा कारोबार के ज्यादातर हिस्से के पुनर्बीमा के लिए समझौते और उसका नवीकरण 1 अप्रैल से होता है

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आतिरा वारियर   
Last Updated- April 03, 2026 | 10:06 PM IST

नवीकरण के नए चक्र में पुनर्बीमा दरों में भारी कमी आई है। प्रॉपर्टी प्रीमियम 85 से 90 प्रतिशत तक कम हुआ है। उद्योग जगत के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि कम नुकसान होने और अंडरराइटिंग क्षमता बढ़ने के कारण ऐसा हुआ है। घरेलू और विदेशी पुनर्बीमा कंपनियों में प्रतिस्पर्धा की भी इस गिरावट में भूमिका रही है। भारत के 3 लाख करोड़ रुपये के गैर जीवन बीमा कारोबार के ज्यादातर हिस्से के पुनर्बीमा के लिए समझौते और उसका नवीकरण 1 अप्रैल से होता है।

इस बार सार्वजनिक क्षेत्र की जीआईसी री के साथ भारत में दो नए घरेलू पुनर्बीमाकर्ता वैल्यूएटिक्स री औरआलियांज जियो रीइंश्योरेंस भी इस कारोबार में उतरे हैं। घरेलू पुनर्बीमाकर्ताओं के अलावा करीब 12-13 विदेशी पुनर्बीमा कंपनियों की शाखाएं (एफआरबी), गिफ्ट सिटी के पुनर्बीमाकर्ता व सीमा पार पुनर्बीमाकर्ता भी इस कारोबार में मौजूद हैं।

ब्रोकरों ने बताया कि विमानन और अन्य उच्च-जोखिम वाले उद्योगों जैसे कुछ व्यापारिक क्षेत्रों में दरें बढ़ी हैं, जबकि मैरीन बीमा प्रीमियम मोटे तौर पर स्थिर बने रहे। हालांकि मुनाफे पर दबाव के बावजूद बीमाकर्ता बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने और बढ़ाने के लिए कीमतें कम कर रहे हैं। यहां तक कि अधिक दावों वाले खातों की कीमतों में भी कमी देखी गई है।

बाजार में नरमी के बावजूद जलवायु-संबंधित जोखिमों, साइबर और लंबी अवधि की देनदारियों जैसे खंडों में प्रतिस्पर्धी मूल्य देखा जा रहा है। स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्रों में महामारी के बाद की चिकित्सा का खर्च बढ़ने और बढ़ते दावों की गंभीरता के कारण बढ़ोतरी का दबाव आया है।

इंश्योरेंस ब्रोकरों ने भी कहा कि पश्चिम एशिया में टकराव का कोई असर भारत के 1 अप्रैल से होने वाले नवीकरण पर नहीं पड़ा है। कुछ विशेष क्षेत्रों पर थोड़ा असर दिख रहा है।

गाय कारपेंटर के मुताबिक1 अप्रैल को एक ‘सेडेंट-फ्रेंडली’ नवीनीकरण के रूप में चिह्नित किया गया है, जिसकी वजह भारत में कम नुकसान और मजबूत स्थानीय बाजार है। इसे हाल के वर्षों में सबसे प्रतिस्पर्धी नवीनीकरण सीजन में से एक बताया गया है।

हाउडेन इंडिया के एमडी और सीईओ अमित अग्रवाल ने कहा, ‘संपत्ति मूल्य निर्धारण में भारी गिरावट की वजह उच्च प्रतिस्पर्धा है। मांग स्थिर बनी रही, लेकिन आपूर्ति में काफी वृद्धि हुई। मौजूदा बीमाकर्ताओं और नए आने वालों ने बाजार हिस्सेदारी हासिल करने या बनाए रखने की कोशिश की। कोई बाजार समझौता नहीं था और बीमाकर्ताओं ने खुलकर बोली लगाई। संपत्ति बीमा बाजार लगभग 4000-4500 करोड़ रुपये का होने का अनुमान है और प्रीमियम में गिरावट के कारण इसके लगभग 1500 से 2000 करोड़ रुपये तक सिकुड़ने की उम्मीद है। ये अनुमानित आंकड़े हैं, क्योंकि अंतिम आंकड़े अभी नहीं आए हैं।’

भारत में गैर जीवन बीमा बाजार करीब 3 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि संपत्ति प्रीमियम में गिरावट से समग्र वृद्धि में लगभग 1 प्रतिशत की कमी होने की उम्मीद है। पुनर्बीमा (संधि और फेस-टू-फेस सहित) का अनुमान कुल बाजार के लगभग एक-तिहाई यानी लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का है।

लॉकटन इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी और कंट्री हेड संदीप डाडिया ने कहा, ‘उच्च-जोखिम वाले कुछ क्षेत्रों से उसी के अनुसार शुल्क लिया जा रहा है, इसलिए कुछ व्यापारिक क्षेत्रों में दरों में भिन्नता है। कुछ खंडों में दरें नरम हुई हैं, लेकिन दूसरों की तुलना में कम हैं। बाजार में अतिरिक्त क्षमता है, जिसके कारण दरें नरम हुई हैं।’

First Published : April 3, 2026 | 9:59 PM IST