India hotel sector investment: इस साल भी भारत के होटल व पर्यटन क्षेत्र में मजबूती देखने को मिल रही है। 2026 की पहली तिमाही के दौरान होटल उद्योग में लेन देन मूल्य में बड़ा इजाफा देखने को मिला। पिछले साल भी होटल उद्योग में निवेश ने अच्छी खासी वृद्धि दर्ज की गई। यह निवेशकों के भारत के पर्यटन और होटल उद्योग में भरोसे को दर्शाता है और इस क्षेत्र की स्थिरता और आकर्षक रिटर्न क्षमता का संकेत देता है।
जेएलएल की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की पहली तिमाही में होटल सेक्टर में लेन देन का कुल मूल्य 18.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जो 2025 की पहली तिमाही के 11.7 करोड़ डॉलर निवेश की तुलना में 58% अधिक है। प्रमुख निवेश गतिविधियों में Warburg Pincus द्वारा Fleur Hotels (Lemon Tree Hotels की सहायक कंपनी) में 41% हिस्सेदारी खरीदना शामिल है, जिसमें पोर्टफोलियो विस्तार के लिए 10.7 करोड़ डॉलर का निवेश किया गया। 2026 तक निरंतर निवेश गतिविधियों का समर्थन कई संरचनात्मक कारक कर रहे हैं जैसे सूचीबद्ध होटल कंपनियों में पर्याप्त तरलता और अतिरिक्त ऑपरेटरों द्वारा पोर्टफोलियो विस्तार के लिए पूंजी बाजार में प्रवेश की संभावना, लेनदेन के प्रवाह के लिए अनुकूल परिस्थितियां आदि।
इस बीच, संस्थागत पूंजी और प्राइवेट इक्विटी फंड सक्रिय रूप से होटल पोर्टफोलियो अधिग्रहण के अवसर तलाश रहे हैं। सरकारी पहलों से भी महत्वपूर्ण अवसर मिल रहे हैं, जैसे हवाई अड्डों पर भूमि से आय सृजन और रणनीतिक माइक्रो-मार्केट्स में सरकारी नीलामी, जिनमें यशोभूमि (IICC), हैदराबाद का नियोपोलिस, चेन्नई का फिनटेक सिटी और जवार एयरपोर्ट शामिल हैं। साथ ही, वित्त वर्ष 2027 का पर्यटन-केंद्रित बजट विस्तार को और प्रोत्साहित करता है, जिसमें पुरातात्विक स्थलों के आसपास 15 नए सांस्कृतिक गंतव्य विकसित करने और परिवहन अवसंरचना में सुधार करने की पहल शामिल है, जो मांग और विकास को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन की गई हैं।
Also Read: सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों में खर्च कटौती अभियान, EV अपनाने और विदेशी यात्राओं पर रोक के निर्देश
भारत का होटल और पर्यटन क्षेत्र 2025 में अभूतपूर्व निवेश वृद्धि के साथ उभरा। जेएलएल के अनुसार इस साल होटल में कुल निवेश लगभग 56.7 करोड़ डॉलर रहा, जो 2024 के 34 करोड़ डॉलर की तुलना में 67% अधिक था। यह आंकड़ा निवेशकों के भारत के पर्यटन और होटल उद्योग में भरोसे को दर्शाता है और इस क्षेत्र की स्थिरता और आकर्षक रिटर्न क्षमता का संकेत देता है।
पिछले साल होटल व पर्यटन सेक्टर में निवेश में विविधता देखने को मिली। जेएलएल के अनुसार 2025 में इस सेक्टर में हुए कुल निवेश में सबसे अधिक 35% हिस्सेदारी संस्थागत पूजी और प्राइवेट इक्विटी फर्मों की रही। इसके बाद उच्च नेट वर्थ व्यक्तियों और फेमिली ऑफिस का हिस्सा 27%, सूचीबद्ध होटल कंपनियों का 25%, रियल एस्टेट डेवलपर का 8% का हिस्सा था। विशेषज्ञों के अनुसार यह संतुलित निवेश संरचना विभिन्न जोखिम और निवेश दृष्टिकोण वाले निवेशकों को आकर्षित करती है।
टियर 2 और 3 शहर प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरे, जिन्होंने कुल लेनदेन का लगभग 40% हिस्सा हासिल किया, जो पिछले साल की गति को बनाए रखता है। इन बाजारों में प्रीमियम संपत्तियां शामिल थीं, जैसे ऋषिकेश में लक्जरी रिसॉर्ट्स, गोवा में अपर-अपस्केल प्रॉपर्टीज़, और लुधियाना, नासिक, वडोदरा, उदयपुर और लोनावला जैसे उभरते शहरी केंद्रों में अपस्केल से मिड-स्केल होटल।
कुल लेनदेन का 69% ऐसे होटलों में हुआ जो पहले से काम कर रहे हैं, 18% ऐसे थे जो अभी निर्माणाधीन या बंद थे और 13% जमीन या लीज से जुड़े लेनदेन में हुआ। इसका मतलब है कि निवेशक ऐसे होटल पसंद करते हैं जो पहले से आय दे रहे हों और जिनका संचालन अच्छा हो।
Also Read: तेल और सोने ने बिगाड़ा भारत का हिसाब, एक महीने में 8 अरब डॉलर बढ़ा घाटा
जेएलएल के अनुसार लक्जरी श्रेणी ने सबसे अधिक लेनदेन हिस्सेदारी हासिल की, जो 42% थी, इसके तुरंत बाद अपस्केल प्रॉपर्टीज का हिस्सा 41% रहा, जो प्रीमियम स्थिति की मजबूत मांग को दर्शाता है। अपर-अपस्केल (9%), मिडस्केल (6%), और इकॉनमी (2%) सेगमेंट ने बाजार का शेष हिस्सा पूरा किया।
2025 में 424 होटलों के लिए नए होटल अनुबंध हुए, जिनमें कुल 51,647 कमरे जुड़े और इनमें से 71% कमरे टियर 2 और 3 शहरों में थे। ग्रीनफील्ड विकास (नई होटल परियोजनाएं) में भी बढ़ोतरी हुई और यह 33,170 कमरे तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 17% अधिक है। 2025 में 103 ब्रांडेड होटल खुले और इनमें कमरों की संख्या 8,990 रही, जिनमें से 64% कमरे टियर 2 और 3 शहरों में थे। यह दर्शाता है कि होटल की आपूर्ति विभिन्न शहरों और बाजारों में संतुलित रूप से बढ़ी है। 250+ कमरे वाले बड़े होटल भी बढ़े। इस साल 29 नए अनुबंध हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 21 थी। ये ज्यादातर मुंबई, बेंगलूरु, हैदराबाद, पुणे और दिल्ली में थे। लेकिन अब ये होटल गुवाहाटी, विशाखापट्टनम, इंदौर और पुष्कर जैसे उभरते शहरों में भी बन रहे हैं।
जेएलएल में मैनेजिंग डायरेक्टर (होटल- इंडिया) और सीनियर डायरेक्टर (होटल कैपिटल मार्केट्स, एशिया) गौरव शर्मा ने कहा कि भारत का होटल निवेश बाजार तेजी से बढ़ रहा है। खास बात यह है कि यह विस्तार अब केवल प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। टियर 2 और 3 शहर धीरे-धीरे परिपक्व और निवेश-योग्य गंतव्य बन रहे हैं। 2026 की शुरुआत भी मजबूत रही, जो यह दर्शाता है कि पूंजी की मांग स्थिर बनी हुई है। हालांकि बाहरी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं और उन्हें नजर में रखना आवश्यक है, लेकिन आधारभूत चालक मजबूत घरेलू मांग, अवसंरचना का विस्तार और विविध पूंजी स्रोत निरंतर विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।