प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देश के सूचीबद्ध रियल एस्टेट डेवलपर साल वित्त वर्ष 27 में अपने नकदी प्रवाह और परियोजनाएं पूरी करने को प्राथमिकता देने की उम्मीद कर रहे हैं। विश्लेषकों और उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार यह पिछले कुछ वर्षों के दौरान देखी गई जबरदस्त कारोबारी वृद्धि से बदलाव का संकेत है। वैश्विक महामारी के बाद मकानों की बिक्री के दमदार दौर और हाल के वर्षों में जमीन की भारी खरीद के बाद अब डेवलपर विस्तार की सोची-समझी रणनीति अपना रहे हैं। इसकी वजह यह है कि प्रमुख आवास बाजारों में बिक्री की रफ्तार सामान्य हो रही है।
इक्विरस में सेक्टर प्रमुख (बुनियादी ढांचा) विजय अग्रवाल ने कहा, ‘डेवलपर अब ज्यादा सोच-समझकर फैसले कर रहे हैं और बैलेंस शीट पर बोझ डाले बिना संयुक्त डेवलपमेंट जैसे ‘ऐसेट-लाइट’ मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि अब उनका ध्यान बैलेंस शीट में कम कर्ज के साथ परियोजनाएं पूरी करने और नकदी प्रवाह पर है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज ने वित्त वर्ष 26 में 42,100 करोड़ रुपये की अनुमानित बिक्री क्षमता वाली परियोजनाएं जोड़ीं, जो उसके अनुमान से दोगुनी से भी ज्यादा थीं। कंपनी ने वित्त वर्ष 27 में 20,000 करोड़ रुपये की कारोबार वृद्धि का अनुमान जताया है। कंपनी ने कहा कि अगर निवेश अनुमान के हिसाब से रहा, तो उसका ‘मुक्त नकदी प्रवाह’ धनात्मक हो सकता है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज के कार्यकारी चेयरपर्सन पिरोजशाह गोदरेज ने वित्त वर्ष 26 के आय परिणामों की बातचीत में कहा कि कंपनी वर्षों के तेज विस्तार के बाद अधिक टिकाऊ बढ़ोतरी को लक्ष्य कर रही है। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा परियोजनाओं के प्रतिशत के रूप में और परिचालन नकदी प्रवाह के प्रतिशत के रूप में कारोबारी बढ़ोतरी का स्तर कम होता रहेगा। इसलिए हम कारोबार के विकास में निवेश का अधिक सुसंगत स्तर देखेंगे, जबकि हमारी बिक्री, संग्रह और परिचालन नकदी प्रवाह में तेजी से वृद्धि होगी।’
वित्त वर्ष 26 में लोढ़ा डेवलपर्स का सकल विकास मूल्य (जीडीवी) लगभग 60,000 करोड़ रुपये था, जो उसके बताए गए लक्ष्य का लगभग 2.4 गुना है। अलबत्ता कंपनी ने मौजूदा परियोजनाओं प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा है कि अगले दो वर्षों में कारोबार बढ़ोतरी पर खर्च नरम रह सकता है।
वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही के कंपनी परिणाम की बातचीत के दौरान प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी अभिषेक लोढ़ा ने कहा, ‘1 अप्रैल तक बिक्री के लिए हमारा उपलब्ध जीडीवी लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था।’