जेवर हवाई अड्डे की घोषणा 2021 में की गई थी।
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनआईए) के उद्घाटन से यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन-जायदाद के दाम काफी बढ़ने के आसार हैं। बाजार विश्लेषकों और डेवलपरों का कहना है कि रिहायशी और औद्योगिक दोनों इकाइयों की कीमतों में इजाफा होगा जिसका असर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाजारों पर भी पड़ेगा।
रियल एस्टेट सलाहकार फर्म कॉलियर्स के आंकड़ों के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में अगले दो वर्षों के दौरान भूखंड के दाम करीब 28 फीसदी और अपार्टमेंट की कीमतें करीब 22 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। जेवर भी इसी इलाके में स्थित है जहां नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन शनिवार को होगा।
जेवर हवाई अड्डे की घोषणा 2021 में की गई थी। उसके बाद से ही इस क्षेत्र के रियल एस्टेट में काफी हलचल देखी जा रही है। पिछले 5 वर्षों के दौरान यीडा इलाके के अपार्टमेंट की कीमतें करीब तीन गुना बढ़ चुकी हैं। कीमतें 2020 में 3,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2025 में 9,600 रुपये प्रति वर्ग फुट दर्ज की गईं।
नैशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि यमुना एक्सप्रेसवे एसईजेड के कुछ सेक्टरों में दरें पहले ही करीब 8,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘यह काफी महत्त्वपूर्ण है। खास तौर पर यह देखते हुए कि जेवर के प्रभाव वाले इलाकों जमीन के दाम पिछले 5 वर्षों के दौरान करीब 40 फीसदी बढ़ चुके हैं।’
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डेवलपरों और बाजार विश्लेषकों का कहना है कि शुरुआती वृद्धि को निवेशकों से रफ्तार मिलने की उम्मीद है। ऐसे में विशेष रूप से कॉरिडोर के साथ भूखंडों और शुरुआती स्तर की रिहायशी परियोजनाओं में वृद्धि होगी।
नोएडा के निंबस ग्रुप के मुख्य कार्याधिकारी साहिल अग्रवाल ने कहा, ‘कम ऊंचाई वाली परियोजनाओं और एकीकृत टाउनशिप की लोकप्रियता बढ़ रही है। उद्योगों और संस्थानों का संचालन शुरू होने के साथ ही अच्छी तरह से नियोजित रिहायशी परियोजनाओं की मांग बढ़ रही है।’
यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास भूखंडों की कीमतें 2020 में 1,100 रुपये प्रति वर्ग फुट थीं जो करीब 127 फीसदी बढ़कर 2025 में 2,500 रुपये प्रति वर्ग फुट हो चुकी हैं। साल 2027 तक इसे 3,200 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंचने का अनुमान है।
डेटा सेंटर जैसी औद्योगिक इकाइयों में लगातार निवेश किया जा रहा है। इस प्रकार औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक केंद्र स्थापित होने से रोजगार बढ़ने और मध्यावधि में अंतिम उपयोगकर्ता की मांग में बदलाव होने की भी उम्मीद है।
कंट्री ग्रुप के निदेशक अमित मोदी ने कहा, ‘नोएडा एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्र में डेटा सेंटर, आईटी पार्क, लॉजिस्टिक्स हब, रिटेल और होटल संपत्तियों में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।’
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के कारण यीडा में बढ़ रही दिलचस्पी का फायदा पड़ोसी नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाजारों को भी मिलेगा।
नोएडा मेट्रो के विस्तार और गाजियाबाद-जेवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) जैसी बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी वाली परियोजनाओं से इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही इससे आसपास के तकनीकी एवं फिल्म केंद्रों में 4,50,000 से अधिक नौकरियों का सृजन भी होगा। ऐसे में पहले केंद्रीय नोएडा पर ध्यान केंद्रित करने वाले डेवलपर अब ग्रेटर नोएडा और यीडा सहित एक्सप्रेसवे पट्टी में अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं।
सलाहकार फर्म एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से 2025 के बीच नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा के इलाकों में 52,000 से अधिक रिहायशी इकाइयों को लॉन्च किया गया है।
एनसीआर में काम करने वाली रियल एस्टेट कंपनी निराला वर्ल्ड के सीएमडी सुरेश गर्ग ने कहा कि नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कीमतों में 20 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि यीडा लक्जरी होटल और हाई-स्ट्रीट रिटेल में काफी निवेश आकर्षित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष रूप से ग्रेटर नोएडा में परियोजनाओं के लॉन्च में तेजी दिख रही है। जैन ने कहा, ‘भूमि की उपलब्धता एवं नियोजित सेक्टर के मद्देनजर ग्रेटर नोएडा एक दमदार रिहायशी एवं संस्थागत केंद्र के रूप में उभर सकता है।’
ग्रेटर नोएडा में सबसे अधिक यानी करीब 32,179 इकाइयों की आपूर्ति दर्ज की गई है। उसके बाद नोएडा में 11,312 और यीडा में 8,544 इकाइयां आईं। डेवलपरों ने कहा, ‘नई परियोजनाओं में रिहायशी इकाइयां सबसे अधिक हैं जो विशेष रूप से प्रीमियम एवं ऊपरी श्रेणी की हैं।’
खरीदारों का प्रोफाइल भी बदल रहा है। नोएडा की प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों में धनाढ्य व्यक्तियों के अलावा प्रवासी भारतीय, कंपनियां, छोटे एवं मझोले शहरों के उद्यमी और चर्चित हस्तियां शामिल हैं।
स्मार्टवर्ल्ड डेवलपर्स के अध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) आशिष जेरथ ने कहा, ‘नोएडा न केवल दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली से अपग्रेड करने वाले मकान खरीदारों को फायदा पहुंचा रहा है बल्कि एक्सप्रेसवे के जरिये तेज कनेक्टिविटी के साथ यह उत्तर प्रदेश भर के खरीदारों को भी निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।’
बीपीटीपी ग्रुप के सीईओ मणिक मलिक ने कहा कि नए हवाई अड्डे से निकटता को देखते हुए हरियाणा के फरीदाबाद को भी दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे (डीएमआईसी) और जेवर के बीच प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के कारण बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिलेगा।
यीडा क्षेत्र गुरुग्राम जैसे दिल्ली एनसीआर के अन्य प्रीमियम बाजारों के मुकाबले काफी सस्ता है। अग्रवाल ने कहा, ‘अगर नोएडा और गुरुग्राम जैसे स्थापित बाजारों से तुलना की जाए तो यमुना एक्सप्रेसवे काफी सस्ता है।’
एनारॉक ग्रुप के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार ने बताया कि गुरुग्राम में औसत कीमतें 13,000 रुपये प्रति वर्ग फुट हैं जो नोएडा में 10,300 रुपये प्रति वर्ग फुट के मुकाबले 26 फीसदी अधिक हैं। ग्रेटर नोएडा में कीमतें 7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट के मुकाबले गुरुग्राम की औसत कीमतों में 73 फीसदी का अंतर है। यीडा में कीमतें गुरुग्राम के मुकाबले लगभग आधी हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में भी वृद्धि की काफी गुंजाइश है।
नाइट फ्रैंक इंडिया की राष्ट्रीय निदेशक (अनुसंधान) अंकिता सूद ने कहा कि दिल्ली एनसीआर में रिहायशी कीमतों के लिहाज से ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र नोएडा के मुकाबले सस्ते हैं। इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों को भी फायदा होगा।