रियल एस्टेट

रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ी गिरावट: 2026 की पहली तिमाही में 36% घटे नए प्रोजेक्ट्स, डेवलपर सतर्क

बेंगलूरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों की इस गिरावट में खासी हिस्सेदारी रही। इसकी वजह है कि डेवलपर मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं

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प्राची पिसल   
Last Updated- April 20, 2026 | 10:13 PM IST

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र में परियोजनाएं पूरी होने के मामले में तिमाही आधार पर 36 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है और इनका आकार घटकर 97 लाख वर्ग फुट रह गया है। कार्यस्थल समाधान फर्म वेस्टियन ने यह जानकारी दी है। पिछली चार तिमाहियों में दर्ज यह सबसे निचला स्तर है। बेंगलूरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों की इस गिरावट में खासी हिस्सेदारी रही। इसकी वजह है कि डेवलपर मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपना रहे हैं।

मुंबई के टुडे ग्रुप के प्रबंध निदेशक भद्रेश शाह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं ने डेवलपरों को अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया है, विशेष रूप से वाणिज्यिक श्रेणी में, जो चिंता के बजाय बाजार की परिपक्वता का संकेत है।’ उन्होंने कहा, ‘साथ ही मांग की बुनियादी चीजें दमदार बनी हुई हैं। यह अस्थायी ठहराव है और वाणिज्यिक रियल एस्टेट का नजरिया मजबूती के साथ सकारात्मक और विकास-उन्मुखी बना हुआ है।’

इस बीच पिकान रियल्टी के संस्थापक और प्रबंध भागीदार रोहित गरोडिया ने कहा कि निर्माण गतिविधियों में आई इस नरमी का करण पश्चिम एशिया के संकट को मानना बातों का सरलीकरण होगा। भारत का वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र स्थिर अर्थव्यवस्था, नियंत्रित महंगाई और स्थिर ब्याज दरों के बल पर अपनी मजबूती साबित कर चुका है।

हैदराबाद में पूरी हुई नई परियोजनाओं में साल 2025 की चौथी तिमाही के 60 लाख वर्ग फुट की तुलना में साल 2026 की पहली तिमाही में भारी संकुचन देखा गया और यह घटकर केवल 3 लाख वर्ग फुट रह गया है। इसमें 95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस बीच मुंबई में पूरी हुई परियोजनाओं का आकार 12 लाख वर्ग फुट रहा। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 29 प्रतिशत की गिरावट आई जबकि बेंगलूरु में 42 लाख वर्ग फुट की परियोजनाएं पूरी हुईं और इसमें तिमाही आधार पर 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की ई।

पूरी होने वाली नई परियोजनाओं में नरमी के बावजूद साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान कार्यालय उपभोग की दर पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत तक बढ़कर 2.153 करोड़ वर्ग फुट हो गई। इससे पश्चिम एशिया संघर्ष और दुनिया में आर्थिक चुनौतियों के बीच उपभोग की निरंतर मांग का पता चलता है।

First Published : April 20, 2026 | 9:51 PM IST