facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

पलायन से बढ़ी शहरी गरीबी!

Advertisement

दिल्ली में 11 में से पांच जिलों (मध्य, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण पश्चिम और नई दिल्ली) में बहुआयामी गरीबी बढ़ गई।

Last Updated- July 24, 2023 | 11:02 PM IST
poverty

नीति आयोग ने पिछले हफ्ते जारी बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) जारी किया था, जिसमें 2015-16 और 2019-21 के बीच देश भर में गरीबी में तेज कमी दिखाई गई थी। मगर 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 24 जिलों में उसी दौरान गरीबी बढ़ गई, जिसका कारण संभवत: शहरों की ओर पलायन था।

दिल्ली में 11 में से पांच जिलों (मध्य, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण पश्चिम और नई दिल्ली) में बहुआयामी गरीबी बढ़ गई। पंजाब में पांच जिलों (बठिंडा, फरीदकोट, जालंधर, लुधियाना, रूपनगर), केरल में चार जिलों (कासरगोड, कोट्टायम, कोझिकोड, पलक्कड़) और हरियाणा (अंबाला, यमुनानगर), तमिलनाडु (चेन्नई, डिंडीगुल) तथा सिक्किम (मांगन, नामची) में भी गरीबी बढ़ी। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एक-एक जिले में भी उस दरम्यान गरीबी में इजाफा देखा गया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हिमांशु कहते है कि प्रवासियों की लगातार आमद के कारण इन जिलों में बहुआयामी गरीबी के शिकार लोगों का अनुपात बढ़ा हो सकता है। ये प्रवासी देश के अंदरूनी इलाकों से पलायन कर शहर आते हैं। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत के शहरों और कस्बों में भीतरी इलाकों से लोगों का आना लगा रहता है, इसलिए उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार के लिए चुनौती बन जाता है। इसलिए हमें शहरी गरीबी की ओर ध्यान देना चाहिए, जिस पर नीति निर्माताओं को ध्यान नहीं के बराबर है।’

Also read: भारत और ब्रिटेन में FTA को लेकर 11वें दौर की बातचीत पूरी

चौथे और पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के बीच के आंकड़े बताते हैं कि इस बीच मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले में बहुआयामी गरीब आबादी का अनुपात सबसे अधिक बढ़ गया। पहले इनकी आबादी 39.6 फीसदी थी मगर पांचवें सर्वेक्षण तक यह बढ़कर 52.5 फीसदी हो गई। इसके बाद बीजापुर, उत्तरी दिल्ली, फरीदकोट और बठिंडा जिलों में गरीबों की आबादी सबसे अधिक बढ़ी।

Advertisement
First Published - July 24, 2023 | 11:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement