फिनटेक

OpenAI और Anthropic ने बदली भारतीय फिनटेक की किस्मत! अब विदेशों से आएगा पैसा?

फिनटेक उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि एआई कंपनियां उनके व्यापारिक आधार के भीतर सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणियों में शामिल हैं

Published by
अजिंक्या कवाले   
Last Updated- June 15, 2026 | 8:02 AM IST

ओपनएआई, एंथ्रोपिक, रिप्लिइट, इमरजेंट जैसी वैश्विक कंपनियों के आने से भुगतान प्रक्रिया वाली भारतीय कंपनियों के लिए सीमा पार यानी विदेशों में भुगतान के अवसर खुल रहे हैं। यह सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र की वैश्विक कंपनियां भारत के फिनटेक क्षेत्र के लिए विकास के नए जरिये के रूप में उभर रही हैं। फ्रंटियर मॉडल डेवलपर और देसी बाजार को लक्ष्य करने वाली ऐप्लिकेशन-लेयर कंपनियां यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और कार्ड जैसे माध्यमों से भुगतान लेना चाह रही हैं।

फिनटेक उद्योग के अधिकारियों ने कहा कि एआई कंपनियां उनके व्यापारिक आधार के भीतर सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणियों में शामिल हैं। आने वाले वर्षों में इनके विकास का प्रमुख स्रोत बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक एआई सेवाओं की मांग बढ़ रही है। देश की भुगतान एग्रीगेटर रेजरपे के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) राहुल कोठारी ने कहा, ‘एआई अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम से कम दोगुना बढ़ेगा। अगर एक साल में मौजूदा वॉल्यूम 10 गुना हो जाता है, तो मुझे ताज्जुब नहीं होगा।’

भुगतान प्रक्रिया पर ऐसे समय जोर दिया जा रहा है, जब भारत को दुनिया में एआई अपनाने के लिए सबसे आकर्षक बाजारों में से एक माना जा रहा है। इस साल फरवरी में एंथ्रोपिक इंडिया की प्रमुख इरिना घोष ने कहा था कि भारत में कंपनी के राजस्व की दर पिछले छह महीने के दौरान दोगुनी हो चुकी है और वैश्विक स्तर पर भारत क्लॉड डॉट एआई का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।

एक रिपोर्ट में ओपनएआई ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर भारत एआई बिल्डर के सबसे तेजी से बढ़ते तंत्र में से एक है और फरवरी 2026 में उसकी कोडेक्स ऐप की शुरुआत के केवल दो ही सप्ताह बाद कोडेक्स के उपयोगकर्ताओं में चार गुना वृद्धि हो चुकी है।

सीमा पार भुगतान क्षेत्र की फिनटेक कंपनी स्काईडू के संस्थापक मोविन जैन ने कहा, ‘जब सीमा पार भुगतान की बात आती है, तो एआई को सीमा पार भुगतान की बहुत खास श्रेणी बनने में शायद एक या दो साल लगेंगे। मेरा अंदाजा है कि इस साल के आखिर तक कुल भुगतान प्रवाह में इसकी हिस्सेदारी शायद पांच से 10 प्रतिशत हो जाएगी।’

सीमा पार भुगतान पर ऐसे समय ध्यान दिया जा रहा है, जब भुगतान प्रक्रिया की देसी कंपनियां इस क्षेत्र के भीतर आकर्षक मार्जिन की तलाश कर रही हैं। कैशफ्री पेमेंट्स को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में सीमा पार भुगतान की राजस्व में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी, जो अभी 9 प्रतिशत है। रेजरपे के कोठारी ने कहा कि ग्लोबल कंपनियां मुख्य रूप से यूपीआई शुरू करने, अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए कार्ड लेनदेन की सफलता की दर बेहतर बनाने और भारत में अपने गो-टु-मार्केट प्रयासों में मदद के लिए स्थानीय साझेदारी खोजने पर ध्यान दे रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘भले ही ग्राहकों के पास कार्ड हों, लेकिन भारत में नए कार्डों पर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन अक्सर बाई डिफॉल्ट बंद रहते हैं, जिससे भुगातन की सफलता की दर कम हो जाती है। कुछ कंपनियां भारतीय बाज़ार में इतनी नई हैं और उनका ध्यान अमेरिका पर इतना ज्यादा है कि उन्हें भारत में ऐसे साझेदारों की जरूरत होती है, जो न केवल भुगतान में उनकी मदद करे, बल्कि उनके साधनों को बाजार में उतारने में भी मदद करे।’

First Published : June 15, 2026 | 8:02 AM IST