Prime Minister Narendra Modi (File photo)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कुवैत के अमीर शेख मशाल अल-अहमद अल-जाबेर अल-सबाह के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में कुवैत पर हालिया हमलों की निंदा की और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत ने ओमान का आभार भी जताया जिसने आग से प्रभावित पलाउ गणराज्य के ध्वज वाले टैंकर से भारतीय चालक दल के 24 सदस्यों को बचाया।
भारत के अधिकारियों ने इस पर पर कुछ नहीं कहा कि क्या दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा में ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे भी शामिल थे। वहीं समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने मंगलवार को रिपोर्ट किया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार कुवैत एशिया के रिफाइनरों को अपना कच्चा तेल बेचने की पेशकश कर रहा है। कुवैत के मुख्य निर्यात ग्रेड के तेल के कम से कम 40 लाख बैरल जो दो बहुत बड़े क्रूड कैरियर्स पर लदे हैं, उन्हें चीन और दक्षिण कोरिया के रिफाइनरों को दिया जा रहा है।
पश्चिम एशिया में संघर्षरत पक्षों के बीच नए सिरे से हमलों के चलते हाल के दिनों में ईरान ने कुवैत के प्रतिष्ठानों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है। इनमें 3 जून को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला भी शामिल है जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और कई घायल हुए। 30 मार्च को कुवैत में बिजली और जल शुद्धीकरण संयंत्र पर ईरानी हमलों में एक अन्य भारतीय नागरिक की मौत हुई थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और कुवैत के अमीर ने फोन बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति पर विचार साझा किए। पीएमओ के बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के माध्यम से जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने का आह्वान दोहराया। मोदी ने कुवैत में बड़े भारतीय समुदाय की निरंतर भलाई और सुरक्षा के प्रति अमीर के व्यक्तिगत ध्यान के लिए धन्यवाद दिया। कुवैत में 10.3 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं। भारतीय वहां का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय हैं जो देश की कुल जनसंख्या का 20 प्रतिशत हैं। गत 3 जून को भारत ने कुवैत हवाई अड्डे पर हुए हमले की निंदा की थी और कड़े शब्दों में आग्रह किया था कि नागरिक आबादी और नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उसने सभी पक्षों से ऐसे हमले रोकने का आह्वान किया था। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत ने ओमान का धन्यवाद किया है, जिसने पालाउ गणराज्य के ध्वज वाले टैंकर से भारतीय चालक दल के 24 सदस्यों को बचाया। यह टैंकर सोमवार को ओमान के तट पर अमेरिकी नौसेना के हमले के बाद आग की चपेट में आ गया था।
उन्होंने बताया कि जहाज एमटी मैरिवेक्स ने हाल के दिनों में ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी से बचने के चार प्रयास किए थे। तीन मौकों पर अमेरिकी नौसेना की बार-बार चेतावनी के बाद जहाज पीछे हट गया। सोमवार को मिसाइल लगने के बाद जहाज में आग लग गई। सूत्रों ने बताया कि यह जहाज अमेरिकी वित्त मंत्रालय की वित्तीय खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल द्वारा प्रतिबंधित था। यह विभाग उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करता है जो ईरानी और रूसी तेल की बिक्री पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जहाज ओमान के तट पर निष्क्रिय हो गया था। उन्होंने कहा, ‘हमें यह भी समझ में आया है कि घटना से पहले जहाज और अमेरिकी नौसेना के बीच कुछ संचार हुआ था।’ उन्होंने बताया, ‘जहाज पर चालक दल के 24 सदस्य थे और वे सभी भारतीय नागरिक थे। सभी को बचा लिया गया है।’
(साथ में एजेंसियां)