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ATF Price Stabilisation Fund: विमानन कंपनियों को राहत, सरकार ने मंजूर किया ₹10,000 करोड़ का फंड

यह सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से तेल मार्केटिंग कंपनियों को ब्याज-मुक्त कर्ज के रूप में प्रदान की जाएगी

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दीपक पटेल   
Last Updated- June 03, 2026 | 10:57 PM IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच विमान ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती लागत से भारतीय विमानन कंपनियों को निपटने में मदद करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के मूल्य स्थिरीकरण कोष के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे दी।

यह सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से तेल मार्केटिंग कंपनियों को ब्याज-मुक्त कर्ज के रूप में प्रदान की जाएगी। तेल मार्केटिंग कंपनियां इस राशि का उपयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने वाली भारतीय विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखने में करेंगी।

सरकार के बयान के अनुसार यह तंत्र ईंधन की कीमतों में अप्रत्याशित अस्थिरता के दौरान विमानन कंपनियों को एटीएफ मूल्य निर्धारण में ‘ज्यादा स्थिरता और पूर्वानुमान’ प्रदान करने के लिए है।

योजना के तहत जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें निर्धारित बेंचमार्क से अधिक होंगी तो तेल कंपनियों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने कहा कि यह कोष तेल मार्केटिंग कंपनियों को बढ़े हुए ईंधन मूल्य से हुए नुकसान की भरपाई करेगा, साथ ही विमानन कंपनियों को निश्चित मूल्य व्यवस्था के तहत संचालन की अनुमति देगा।

सरकार के अनुसार यह तंत्र ईंधन लागत का अनुमान लगाने और विमानन कंपनियों के लिए अचानक ईंधन मूल्य वृद्धि के जोखिम को कम करेगा।

यह योजना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों के लिए सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय विमानन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी। इसमें शामिल होने वाली विमानन कंपनियों को तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना होगा और 3 साल तक या जब तक सहायता राशि पूरी तरह से वसूल नहीं हो जाती तब तक, उक्त कंपनी से एटीएफ खरीदना होगा। इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी। यदि उस अवधि के भीतर रकम पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाती है तो सरकार इस व्यवस्था को आगे बढ़ा सकती है।

इस व्यवस्था में वसूली तंत्र भी शामिल है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें कम होंगी तो इस योजना के तहत दी गई अतिरिक्त रकम तेल कंपनियों से वापस ली जाएगी और भारत के संचित नि​धि में जमा कर दी जाएगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी, जब तक कि पूरी सहायता राशि वापस न मिल जाए और उसका हिसाब-किताब पूरा न हो जाए।

इसके कार्यान्वयन की देखरेख एक निगरानी समिति द्वारा की जाएगी, जिसमें नागर विमानन मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा व्यय विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी दावे और वसूली की ऑडिट की जाएगी। यह फैसला दुनिया भर में विमान ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते लिया गया है। सरकार के मुताबिक मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमतें 60.50 रुपये प्रति लीटर थीं, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गईं यानी दो महीनों में ही कीमतों में लगभग ढाई गुना की बढ़ोतरी हुई है।

विमानन कंपनियों के कुल परिचालन लागत का करीब 40 फीसदी खर्च एटीएफ पर होता है और  अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले समय में यह बढ़कर 60 फीसदी तक भी पहुंच सकता है, जिससे विमान कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर काफी दबाव पड़ता है।

सरकार ने भारतीय विमानन कंपनियों के लिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने का भी जिक्र किया, जिसके कारण यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया के लिए उड़ान मार्ग लंबे हो गए हैं। इससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत बढ़ गई है।

First Published : June 3, 2026 | 10:57 PM IST