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हाइड्रो सेक्टर को बूस्ट, सरकार ने 5 साल में ₹2,585 करोड़ की योजना को दी हरी झंडी

योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले पूर्वोत्तर भारत के राज्यों व जिलों को 30 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता दी जाएगी।

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नंदिनी केशरी   
Last Updated- March 18, 2026 | 9:22 PM IST

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को छोटी पनबिजली परियोजनाओं के लिए एक योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 2031 तक 5 साल के दौरान 2,585 करो़ड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह एक बयान में कहा गया है कि यह योजना 25 मेगावॉट से कम क्षमता वाले संयंत्रों के लिए है, जिससे 1,500 मेगावॉट क्षमता के संयंत्र स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे कुल 15,000 करोड़ रुपये निवेश भी आएगा।

इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले पूर्वोत्तर भारत के राज्यों व जिलों को 30 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता प्रति मेगावॉट अधिकतम 3.6 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 30 प्रतिशत होगी।

अन्य राज्यों में केंद्र सरकार एक परियोजना पर 20 करोड़ रुपये वित्तीय सहायता मुहैया कराएगी, जो 2.4 करोड़ रुपये प्रति मेगावॉट या परियोजना लागत का 20 प्रतिशत तक होगी, इसमें से जो भी कम हो।
इस योजना से राज्यों व केंद्र सरकार की एजेंसियों को करीब 200 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने में मदद मिलेगी, जिसके लिए 30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ने और कार्बन उत्सर्जन में 43 लाख टन सालाना कमी आने की उम्मीद है।

राजमार्ग परियोजना को मंजूरी

मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में बाराबंकी और बहराइच के बीच 101 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को मंज़ूरी दे दी, जिसकी अनुमानित लागत 6,969 करोड़ रुपये है। यह 4 लेन की सड़क होगी, जिसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा। यह राष्ट्रीय राजमार्ग 927 का हिस्सा है।

First Published : March 18, 2026 | 9:14 PM IST