भारत

कृ​षि के भविष्य पर मंथन करने इंदौर में जुटे ब्रिक्स देश, छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर जोर

मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का आज हुआ शुभारंभ

Published by
रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- June 12, 2026 | 7:50 PM IST

मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

छोटे व सीमांत किसानों की समस्याओं का समाधान जरूरी

सम्मेलन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का समर्थक रहा है तथा कृषि क्षेत्र में भी साझेदारी आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से सबसे अधिक छोटे और सीमांत किसान प्रभावित होते हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच संवाद और सहयोग इन समस्याओं के समाधान खोजने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होंगे तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी स्वतः मजबूत होगी।

चौहान ने बताया कि भारत के करीब 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी के हैं। इन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और सिंचाई जैसी योजनाओं का विस्तार किया गया है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर भी जोर दिया।

Also Read: Crude Oil: अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से तेल 70 डॉलर तक आने का अनुमान

ब्रिक्स देशों के आपसी सहयोग से वैश्विक कृषि को मिलेगी नई दिशा

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने ब्रिक्स देशों से खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और छोटे किसानों के सशक्तिकरण के लिए मिलकर काम करने की अपील की। चौहान ने विश्वास जताया कि सम्मेलन के दौरान अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक कृषि विकास को नई दिशा मिलेगी। महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलें ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी बदलाव की नई मिसाल बन रही हैं। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के कारण युवाओं की भागीदारी भी बढ़ रही है, जिससे कृषि अधिक आधुनिक और आकर्षक बन रही है।

भारत का 43 फीसदी कार्यबल कृषि पर निर्भर

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की है। देश का खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर लगभग 37.6 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जबकि गेहूं उत्पादन करीब 11.8 करोड़ टन और बागवानी उत्पादन 37.8 करोड़ टन से अधिक हो गया है। मछली उत्पादन भी 1.9 करोड़ टन पार पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है और कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था तथा आजीविका का प्रमुख आधार बना हुआ है। देश के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल की आजीविका कृषि पर निर्भर है।

First Published : June 12, 2026 | 7:50 PM IST