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CDS अनिल चौहान का बड़ा बयान! थिएटर कमांड से बदलेगी भारत की सैन्य रणनीति, चीन-पाकिस्तान पर सख्त संदेश

CDS अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर, भारत-चीन सीमा स्थिति, पाकिस्तान की रणनीति और एकीकृत थिएटर कमांड पर भारत की रक्षा रणनीति को लेकर अहम जानकारी साझा की।

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सतरूपा भट्टाचार्य   
Last Updated- May 25, 2026 | 9:33 AM IST

रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान का कहना है कि सरकार को भेजी गई एकीकृत थिएटर कमांड योजना में भारत की जमीनी रणनीतिक चुनौतियों और जल क्षेत्र में मौजूद अवसरों को ध्यान में रखा गया है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की शतरूपा भट्टाचार्य ने 21 मई को नई दिल्ली में जनरल चौहान से ऑपरेशन सिंदूर, भारत-चीन सीमा विवाद और भारत के रक्षा बजट पर बातचीत की। पेश हैं संपादित अंश:

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद आपकी नजरों में क्या अहम बातें उभरी हैं?

हम कह सकते हैं कि यह भारत द्वारा अब तक लड़े गए सभी युद्धों से अलग था। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं और सोचता हूं कि हमारी जीत क्यों हुई तो इसका कारण केवल यह नहीं था कि हम लंबी दूरी के सटीक हमले करने में सक्षम थे। यह बिल्कुल एक कारण है मगर यह भी सच है कि हमें पाकिस्तान की तुलना में स्थिति की बेहतर जानकारी थी। हमें तुरंत पता चल जाता था कि हमारे हमले कहां हो रहे हैं और उनका क्या असर हो रहा है। हमें यह भी पता होता था कि दुश्मन क्या कर रहा है और क्या उसे कुछ हासिल हो रहा है या नहीं। इससे हमें हर तरह का फैसला लेने में मदद मिली। पाकिस्तान पूरी तरह से अनजान था, न केवल उन दिनों में जब 10 मई, 2025 को युद्धविराम की घोषणा हुई और उन्हें हार का सामना करना पड़ा बल्कि तीन-चार दिन बाद भी। उन्हें खुद भी यकीन नहीं था कि वे क्या कर पाए हैं।

क्या भारत परोक्ष युद्ध और खास कर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए अधिक बेहतर ढंग से तैयार है?

पाकिस्तान की छद्म युद्ध की रणनीति की जहां तक बात है तो मुझे लगता है कि वे इसके नतीजे समझ नहीं पा रहे हैं। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं कि आतंकवाद की हर और किसी बड़ी आतंकवादी घटना के साथ भारत के लिए पारंपरिक अभियानों के लिए नया अवसर पैदा होता है। जब मैं पारंपरिक अभियानों के लिए अधिक अवसर की बात करता हूं तो मेरा मतलब अधिक भौगोलिक दूरी से नहीं है। वह तो निश्चित रूप से है और गहराई भी है। यह बल स्तरों और कार्यक्षेत्रों की बात है। आप तैयारी की बात करते हैं तो इसमें दो बातें हैं। एक है ऐसी घटनाओं को रोकना ताकि दुश्मन इसे नीति के रूप में इस्तेमाल न करें। दूसरी बात है रोकथाम। सशस्त्र बल रोकथाम की तुलना में प्रतिरोध निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सशस्त्र बल (रोकथाम) का हिस्सा हैं मगर खुफिया एजेंसियां, राज्य सरकारें हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं न हों।

भारत और चीन की सीमा पर फिलहाल क्या स्थिति है? क्या पूरी तरह सैनिकों की वापसी हो चुकी है और गलवान घाटी में संघर्ष के तनाव में किस हद तक कमी आई है?

अक्टूबर 2024 में भारत ने चीन के साथ एक समझौता किया था और उसके आधार पर दोनों पक्ष अपने-अपने गश्ती अधिकारों को बहाल करने में सक्षम रहे हैं। देपसांग और डेमचोक (पूर्वी लद्दाख) में सैनिकों की वापसी पूरी हो चुकी है। हालांकि, औपचारिक रूप से (सैन्य स्तर पर) बातचीत के माध्यम से तनाव में कमी नहीं आई है। मगर हां, एकतरफा तनाव में कमी जरूर आई है। मेरा मानना है कि सीमा पर स्थिति फिलहाल शांतिपूर्ण है और दोनों पक्ष शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। हमारी तैयारी के स्तर की बात करें तो अब तक भारतीय सैनिक लगभग चार-पांच सर्दी के मौसम से गुजर चुके हैं इसलिए वे अच्छी तरह से व्यवस्थित हो चुके हैं। अब उनके (और उनके उपकरणों) के लिए बुनियादी ढांचा तैयार है। तैयारी का स्तर ऊंचे स्तर पर है। बुनियादी ढांचे की बात करें तो हम लद्दाख के लिए कई मार्गों और हर मौसम में काम करने वाली संपर्क व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिससे हमारी तैयारी और भी चाक चौबंद होगी।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मिले चीन के समर्थन पर आप क्या कहेंगे?

तीन बातें हैं जिनमें एक तथ्य है, एक तर्कसंगत अनुमान है और एक काल्पनिक या अटकलबाजी है। हम जानते हैं कि पाकिस्तान अपने रक्षा उपकरणों का 80 प्रतिशत चीन पर निर्भर है। यह जगजाहिर है। जब आप किसी विदेशी मूल उपकरण निर्माता (एफओईएम) से उपकरण खरीदते हैं तो उस उपकरण का रखरखाव करना उस एफओईएम की जिम्मेदारी होती है। आखिरकार, यह युद्ध के लिए खरीदा गया है। वे लक्ष्य साधने में मदद नहीं कर रहे हैं बल्कि वे उनके उपकरणों का रखरखाव कर रहे हैं। चीन के हथियार स्पष्ट रूप से बेइडौ (नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) पर काम कर रहे होंगे। हालांकि, जब पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (पाकिस्तानी सेना की संचार इकाई) ने 7 से 10 मई के बीच संघर्ष के दौरान भारतीय जहाजों (नौसेना की अग्रिम तैनाती) खास कर विमानवाहक पोत समूह की तैनाती के बारे में मीडिया को जो जानकारी दी वह सरासर गलत थी। या तो वे झूठ बोल रहे थे या उन्हें यह जानकारी कहीं और से मिली होगी।

अमेरिका के पास 11 कमान हैं। चीन के पास 5 हैं। भारत एकीकृत थिएटर कमांड को कैसे संगठित करेगा और उनकी क्या जिम्मेदारियां होंगी?

थिएटर कमांन के संबंध में अमेरिका की सोच बिल्कुल अलग है क्योंकि उनकी सेनाओं की भूमिका अभियान आधारित है। उन्होंने वैश्विक जिम्मेदारियां संभाली हैं। अगर आप चीन के मॉडल को देखें तो ऐसा नहीं है। उन्होंने अपने देश के भूगोल को पांच कमानों में विभाजित किया है और विशेष रूप से तिब्बत और शिनजियांग न केवल परिचालन का हिस्सा हैं बल्कि प्रशासनिक भी हैं। हमारी प्रणाली अपने आप में अनूठी है। हम इसे अपनी सीमाओं से बाहर और उससे आगे या नियंत्रण रेखा (पाकिस्तान के साथ वास्तविक सीमा) से आगे देखना पसंद करते हैं। देश के पूरे भूगोल को एक इकाई के रूप में देखा जाएगा।

First Published : May 25, 2026 | 9:33 AM IST