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प. बंगाल को टेक हब बनाने की तैयारी; केंद्र ने Google, Microsoft, Amazon जैसी टेक कंपनियों से शुरू की बातचीत

पश्चिम बंगाल को टेक हब बनाने के लिए गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक टेक कंपनियों के साथ RIL, अदाणी समूह जैसे भारतीय समूहों से बातचीत की जा रही है

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सुरजीत दास गुप्ता   
Last Updated- May 18, 2026 | 9:50 AM IST

केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में डाटा सेंटर, हाइपरस्केलर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) हब में निवेश बढ़ाने के लिए गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक टेक कंपनियों के साथ-साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज और अदाणी समूह जैसे भारतीय समूहों से बातचीत कर रही है। राज्य में सेमीकंडक्टर कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश भी की जा रही है। साथ ही पश्चिम बंगाल में अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) लाने के प्रयास जारी हैं। इनमें से कुछ निवेश जून में अंतिम रूप लेकर घोषित किए जा सकते हैं।

यह पहल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राज्य चुनावों में जीत के बाद तेज हुई है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल पुराने शासन का अंत हुआ। पश्चिम बंगाल में औद्योगिक और आर्थिक विकास को फिर से गति देना भाजपा के चुनावी अभियान का प्रमुख मुद्दा था।

Google, Amazon, Microsoft से बातचीत

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, “हम गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक टेक कंपनियों के साथ-साथ रिलायंस और अदाणी समूह जैसे भारतीय उद्योग समूहों से पश्चिम बंगाल में निवेश के लिए बातचीत कर रहे हैं। डाटा सेंटर और आरएंडडी सेंटर स्थापित करने को लेकर प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है।”

पश्चिम बंगाल सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और आईटी सक्षम सेवाओं (ITeS) के क्षेत्र में पीछे रहा है। वित्त वर्ष 2025 में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) से होने वाले कुल सॉफ्टवेयर निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी केवल 2.1 प्रतिशत रही, जिससे वह राज्यों में सातवें स्थान पर रहा।

कर्नाटक 35 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र (19.1 प्रतिशत), तेलंगाना (15.3 प्रतिशत), तमिलनाडु (12.8 प्रतिशत), हरियाणा (5.3 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (4.6 प्रतिशत) उससे आगे रहे।

डाटा सेंटर क्षेत्र में भी पश्चिम बंगाल पीछे

डाटा सेंटर क्षेत्र में भी पश्चिम बंगाल पीछे रहा है। रियल एस्टेट सलाहकार कंपनी CBRE के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच देश की कुल डाटा सेंटर क्षमता वृद्धि में कोलकाता की हिस्सेदारी केवल 1 प्रतिशत रही। यह पुणे (5 प्रतिशत) और हैदराबाद (4 प्रतिशत) से भी पीछे रहा।

मुंबई देश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर हब बना हुआ है, जिसकी कुल क्षमता में 53 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद चेन्नई (20 प्रतिशत), दिल्ली-एनसीआर (10 प्रतिशत) और बेंगलुरु (7 प्रतिशत) का स्थान है। उद्योग के अनुमान के अनुसार कोलकाता में फिलहाल 6-8 चालू डेटा सेंटर हैं, जबकि 6-10 अन्य निर्माणाधीन हैं या घोषित किए जा चुके हैं।

हालांकि रिलायंस और अदाणी समूह जैसे कई बड़े उद्योग समूह पहले ही बंगाल सिलिकॉन वैली टेक हब में बड़ी जमीन खरीद चुके हैं। इस टेक हब की शुरुआत 2018 में डेटा सेंटर, डीपटेक और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को आकर्षित करने के लिए की गई थी।

RIL-माइक्रोसॉफ्ट बना रहे इंटरनेशनल डाटा सेंटर

रिलायंस ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से दो अंतरराष्ट्रीय डेटा सेंटर और एक टेक्नोलॉजी सेंटर बनाने की योजना बनाई थी। वहीं सुनील भारती मित्तल समर्थित एनएक्स्ट्रा बाय एयरटेल भी राज्य में अपना डेटा सेंटर शुरू करने के करीब है।

चुनाव से पहले भाजपा ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर टीएमसी सरकार की आलोचना की थी। पश्चिम बंगाल, जो 1960-61 में प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में तीसरे स्थान पर था और राष्ट्रीय औसत से 27.5 प्रतिशत ऊपर था, अब 24वें स्थान पर पहुंच गया है। वर्तमान में राज्य की औसत आय राष्ट्रीय औसत से 16.3 प्रतिशत कम आंकी गई है।

First Published : May 18, 2026 | 9:50 AM IST