कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी | फाइल फोटो
सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में गड़बड़ी और अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से राजधर्म का पालन करते हुए इस्तीफे की मांग की। विपक्षी पार्टी ने प्रधान पर अहंकार और अक्षमता की मिसाल बन जाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘सीबीएसई में बैठे जेबकतरों से सावधान रहने की जरूरत है। सीबीएसई की गलती से नंबर गलत आए तो आपको क्या मिलता है? अपनी ही उत्तर पुस्तिका की दोबारा सही जांच के लिए छात्र को 2000 रुपये तक भरने पड़ सकते हैं।’
उनका कहना है, ‘सोचिए, जब चार लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डाले हैं तो सीबीएसई कितनी कमाई कर रहा है। जब स्कैनिंग फोन से हुई हो, तो गलत मार्किंग तय है और उसे ठीक करवाने की कीमत बच्चा भर रहा है। गलती सीबीएसई की, सजा बच्चे को और कमाई सरकार की।’ राहुल गांधी ने दावा किया, ‘जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती, बढ़ाई जाती है। इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं।’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘ओएसएम प्रणाली में साइबर सुरक्षा संबंधी खामियों से इनकार करने के बाद अब सीबीएसई ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया है कि सिस्टम से समझौता किया गया था। लेकिन अपने कॉन्ट्रैक्टर कोएम्प्ट के खिलाफ वह क्या कार्रवाई करने जा रहा है?’
इस बीच, राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कई छात्र संगठनों ने सोमवार को शिक्षा मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया और बार-बार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक के मामलों की जवाबदेही तय करने तथा शिक्षा मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग की। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में नीट, सीयूईटी, एसएससी और सीबीएसई जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग की गई।