केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान | फाइल फोटो
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा कि बीज व कीटनाशकों से संबंधित कानून लगभग तैयार हैं और अगले संसदीय सत्र में पेश कर पारित किए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग 70 प्रतिशत घरेलू कीटनाशक उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से कीटनाशक प्रबंधन विधेयक (पीएमबी) के मसौदे में पांच साल के नियामक डेटा संरक्षण प्रावधान को शामिल करने का आग्रह किया है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि इसके अभाव से कंपनियां भारत में नई और सुरक्षित फसल सुरक्षा तकनीकों को अपनाने से हतोत्साहित होती हैं। क्रॉपलाइफ इंडिया के अध्यक्ष अंकुर अग्रवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अभी भी मौजूदा ढांचा कीटनाशक अधिनियम, 1968 पर आधारित है। इस ढांचे में किसी कंपनी को नए कीटनाशक को पंजीकृत करने से पहले व्यापक सुरक्षा, प्रभावी, अवशेष और पर्यावरणीय डेटा तैयार करना होता है, जिसके लिए कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है।
उन्होंने कहा, ‘नियामक डेटा संरक्षण (आरडीपी) के अभाव में नवप्रवर्तक अपने निवेश की वसूली करने में असमर्थ हैं। इसके परिणामस्वरूप किसान पुराने और सामान्य मोलेक्यूल पर निर्भर रहना जारी रखते हैं। इनमें से कई अधिक खतरनाक हैं और कीटों के बढ़ते प्रतिरोध के खिलाफ कम प्रभावी हैं।’
एसोसिएशन ने मसौदा विधेयक पर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को औपचारिक सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिसमें पहले पंजीकरण से पांच साल की समयसीमा का प्रस्ताव दिया गया। इस प्रस्ताव में पेटेंट प्राप्त नए मोलेक्यूल्स के साथ-साथ उन गैर-पेटेंट अणुओं को भी शामिल किया जाएगा जिनके लिए किसी कंपनी ने स्वतंत्र रूप से नए पंजीकरण डेटा तैयार किए हैं। भारतीय कृषि को कीटों और रोगों के कारण वार्षिक फसल उत्पादन का 10 से 35 प्रतिशत तक नुकसान होता है। इससे सालाना 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होता है।