सरकार ने गुरुवार को कई महत्त्वपूर्ण पेट्रोरसायन कच्चे माल पर 30 जून, 2026 तक सीमा शुल्क में पूरी तरह से छूट देने की घोषणा की। इस फैसले से अगले तीन महीनों में सरकारी खजाने पर करीब 1,800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में आगे उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा करने के लिए कैबिनेट सुरक्षा समिति की विशेष बैठक करने के एक दिन बाद यह अहम कदम उठाया गया है। अभी तक इन उत्पादों के आयात पर 5 से 10 फीसदी के दायरे में सीमा शुल्क लगता था।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, दवा, रसायन और वाहन कलपुर्जा जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बयान में कहा गया, ‘यह कदम अस्थायी एवं लक्षित राहत उपाय के रूप में उठाया गया है ताकि घरेलू उद्योग के लिए आवश्यक पेट्रोरसायन कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहे और प्रसंस्करण क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम हो तथा देश में आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।’
इस छूट में विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख पेट्रोरसायन फीडस्टॉक, मध्यवर्ती उत्पाद और पॉलिमर, जिनमें मेथनॉल, फिनॉल और मोनोएथिलीन ग्लाइकोल जैसे रसायन तथा पॉलिएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) जैसे पॉलिमर शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया कि पिछले रुझानों के आधार पर शुल्क में दी गई राहत के कारण अगले तीन महीनों में लगभग 1,800 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी आगाह किया कि यह अनुमान बदल सकता है।
कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद के महासचिव मिथिलेश्वर ठाकुर ने कहा कि सरकार का यह समय पर उठाया गया कदम पूरे भारतीय उद्योग को, जिसमें टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र भी शामिल है, बड़ी राहत देगा। यह क्षेत्र सिंथेटिक फाइबर और मध्यवर्ती उत्पादों पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
उन्होंने कहा, ‘इससे खास कर ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारी रुकावटें आ रही हैं, कच्चे माल की लागत स्थिर करने, उत्पादन में निरंतरता सुनिश्चित करने और भारत में बने उत्पादों को लागत-प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय उद्योग को कीमतों में उतार-चढ़ाव से भी बचाएगा और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद इसे न केवल टिके रहने में बल्कि आगे बढ़ने में भी मदद करेगा।’
केपीएमजी में अप्रत्यक्ष कर के प्रमुख और पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, ‘वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में यह कदम उत्पादन लागत को कम करके बहुत जरूरी राहत देता है। यह समय पर और आवश्यक हस्तक्षेप है, जिससे विनिर्माण क्षेत्र को लागत के दबाव और आपूर्ति में रुकावट, दोनों से निपटने में मदद मिल सकती है।’