Representative image
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने की दिशा में भारत ने शांति अधिनियम 2025 के अनुरूप एक कदम और बढ़ा दिया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा बिजली मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) और एनटीपीसी के सहयोग से आयोजित एक कार्यशाला में डीएई की सदस्य (वित्त) सीमा जैन ने कहा कि प्रस्तावित एफडीआई नीति को मंजूरी दे दी गई है और इसे अंतर मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजा गया है।
उन्होंने कहा, ‘एफडीआई पहल की प्रक्रिया चल रही है। परमाणु ऊर्जा आयोग ने एफडीआई नीति को मंजूरी दे दी है और यह मंत्रिस्तरीय परामर्श के लिए जा रही है।’ उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र में धन की आवक सुनिश्चित करने और इसे अन्य प्रतिस्पर्धी मांगों से भीड़भाड़ से बचाने के लिए धन जुटाने के नया मॉडल बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘यदि हम 22 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट को मानक आधार बनाते हैं, जो हाल की मंजूरियों के लिए आवश्यक था, तो 2047 तक 100 गीगावाट के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आसानी से लगभग 20 लाख करोड़ रुपये जुटाने की जरूरत है।’ उन्होंने यह भी कहा कि फ्लीट मोड विस्तार या एक साइट पर कई रिएक्टरों से समग्र अनुमोदन चक्र और पूरे परमाणु ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आवश्यक समय कम हो जाएगा। इसी कार्यक्रम में एनटीपीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने निजी क्षेत्र और राज्य की ओर से रुचि की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘विधेयक पारित होने से पहले काफी चर्चा हुई थी। लेकिन इसके लागू होने के बाद कुछ कारणों से निजी क्षेत्र से उत्साह का वह स्तर नहीं देखा जा रहा है।’
हर राज्य में कम से कम एक परमाणु संयंत्र स्थल की पहचान करने की केंद्र सरकार के निर्देश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘हम वर्तमान में लगभग 14 राज्यों के साथ काम कर रहे हैं। मैं यह कहना चाहूंगा कि स्वीकृति दर उतनी अधिक नहीं है।’ केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने परमाणु क्षमता वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए परियोजना समय-सीमा और टैरिफ में कटौती की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए संयंत्रों के लिए शुल्क 5.50 से 6.50 रुपये की सीमा में हैं।