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ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में भारी वृद्धि के बीच भारत की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 9 दिनों में तीसरी बार बढ़ोतरी की है। इस वृद्धि के बाद दिल्ली में गैर-ब्रांडेड पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
पिछले 9 दिन में तेल कंपनियों ने 15 मई को 3 रुपये प्रति लीटर और फिर 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर की दर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। 23 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः 87 पैसे प्रति लीटर और 91 पैसे प्रति लीटर की फिर से बढ़ोतरी की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में कीमतों में लगातार वृद्धि से तेल विपणन कंपनियों को आंशिक राहत मिलेगी, लेकिन पूरी तरह से सुरक्षा नहीं मिलेगी। उनका कहना है कि भले ही पश्चिम एशिया की स्थिति स्थिर हो जाए होर्मुज स्ट्रेट के आसपास का जोखिम पूरी तरह खत्म होने में वक्त लगेगा। इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें संभवतः 90 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर बनी रहेंगी।
अकाउंटिंग और कंसल्टेंसी फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर- तेल और गैस सौरभ मित्रा ने कहा, ‘कमजोर पड़ते रुपये के साथ इसका दबाव तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा है और वे अभी भी अंडर रिकवरी से जूझ रही हैं। आगे चलकर कीमतों में और वृद्धि की जरूरत पड़ सकती है। सरकार को उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव और ओएमसी की वित्तीय सेहत के बीच संतुलन बनाने की जरूरत होगी।’
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नवीनतम और तीसरी बार की वृद्धि के साथ कंप्रेस्ड नैचुरल गैस (सीएनजी) की दरों में भी वृद्धि हुई है। इंद्रप्रस्थ गैस (आईजीएल) ने शनिवार को सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलो की वृद्धि की, जो 10 दिनों में तीसरी वृद्धि है। इसके साथ ही दिल्ली में सीएनजी की कीमत अब 81.09 रुपये प्रति किलो है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में कीमत 89.70 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गई है।
नियंत्रण वाली मूल्य व्यवस्था (एपीएम) वाली गैस की आपूर्ति में गिरावट और सीएनजी व आवासीय पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की बढ़ती मांग के साथ आयातित एलएनजी पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार उच्च लागत वाली एलएनजी को आपूर्ति मिश्रण में मिश्रित करने से सीएनजी वितरण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बढ़ेगा।
मित्रा ने कहा, ‘निकट भविष्य में सीएनजी की बढ़ी कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालना होगा। समय बीतने के साथ इनपुट लागत के दबाव को भी पीएनजी के अंतिम उपभोक्ताओं पर डाले जाने की संभावना है। हालांकि रसोई गैस की कीमत में बढ़ोतरी का मसला संवेदनशील है, ऐसे में पीएनजी की कीमत में धीरे धीरे वृद्धि की उम्मीद है।’
विभिन्न श्रेणी के ईंधन की कीमतों में वृद्धि सरकारी तेल कंपनियों के गंभीर वित्तीय तनाव को देखते हुए हुई है। पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहे कच्चे तेल के मुकाबले कंपनियां सस्ते दाम पर ईंधन बेच रही हैं। संघर्ष शुरू होने के पहले कीमतें लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल थीं।
विपक्षी कांग्रेस ने एक प्रेस नोट में कहा, ‘बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों से परिवहन लागत में तेज वृद्धि हुई है, जिससे सीधे देश भर में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है। ईंधन की अधिक लागत के कारण फलों, सब्जियों, दूध और अन्य घरेलू आवश्यक वस्तुओं जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई बढ़ेगी।’