इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) जांच के दोहराव की पहचान करने और अनावश्यक रूप से दोबारा काम को रोकने के लिए नैशनल फाइनैंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस कवायद का मकसद दोनों निकायों के बीच बेहतर तालमेल को प्रोत्साहन देना है। सूत्रों ने कहा कि आईसीएआई उन मामलों की जांच रोक देगा, जिसकी जांच एनएफआरए ने भी शुरू कर दी है।
आईसीएआई इस समय जेनसोल, ब्लूस्मार्ट और इंडसइंड से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है। इन मामलों की जांच एनएफआरए भी कर रहा है। इसके पहले भी आईसीएआई और एनएफआरए अक्सर आमने सामने आते रहे हैं। आईसीएआई ने ऑडिट मानकों की समीक्षा प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोकने की मांग की थी, ताकि उनकी व्यापक समीक्षा की जा सके। यह तब हुआ था जब एनएफआरए ने सार्वजनिक परामर्श के लिए ऑडिटिंग पर संशोधित मानक 600 (एसए) जारी किए थे। एनएफआरए ने यह कदम इसलिए उठाया था, क्योंकि उसे भारत में होने वाले ग्रुप ऑडिट में गुणवत्ता की गंभीर कमी और उचित सावधानी के अभाव का पता चला था।
हालांकि आईसीएआई का मानना था कि भारतीय बाज़ार की जटिलताओं को देखते हुए ये संशोधित मानक ऑडिट के काम को कुछ बड़ी फर्मों के हाथों में सीमित कर देंगे। आईसीएआई के सूत्रों ने कहा कि भारत की अनूठी नियामक संरचना और पेशेवर माहौल की मांग है कि विदेशी मानकों को लागू करने से पहले देश की अपनी जरूरतों पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाए।
आईसीएआई के फाइनैंशियल रिपोर्टिंग रिव्यू बोर्ड (एफआरआरबी) ने पिछले साल वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जेनसोल इंजीनियरिंग और ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय विवरणों तथा वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट की समीक्षा करने का फैसला किया था। यह समीक्षा एफआरआरबी ने अपनी पहल पर शुरू की थी। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इसी मामले को आगे की जांच के लिए एनएफआरए के पास भेज दिया था।
इंडसइंड मामले में एनएफआरए ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली के माध्यम से इंडसइंड बैंक में लेखांकन संबंधी चूकों की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की थी। यह मामला आईसीएआई की नजर में भी रहा है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अंतिम सिफारिश नहीं की गई है। फरवरी में आईसीएआई के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने कहा था कि उसने शीर्ष 10-15 जनहित मामलों की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें जेनसोल इंजीनियरिंग और इंडसइंड बैंक के मामले शामिल हैं।