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भारत में सोलर क्रांति की तैयारी: अब पॉलिसिलिकन के लिए PLI योजना लाने पर विचार कर रही सरकार

पॉलिसिलिकन असल में सिलिकन का बेहद शुद्ध रूप है। वै​श्विक स्तर पर इसका 95 फीसदी से अधिक उपयोग सौर पैनलों के लिए प्राथमिक कच्चे माल के रूप में किया जाता है

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सुधीर पाल सिंह   
नंदिनी केशरी   
Last Updated- April 08, 2026 | 11:09 PM IST

वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय पॉलिसिलिकन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू करने पर विचार रहा है। यह योजना सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला के एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में पॉलिसिलिकन के उत्पादन को बढ़ाएगी।

पॉलिसिलिकन असल में सिलिकन का बेहद शुद्ध रूप है। वै​श्विक स्तर पर इसका 95 फीसदी से अधिक उपयोग सौर पैनलों के लिए प्राथमिक कच्चे माल के रूप में किया जाता है। सिलिकन को मल्टी-क्रिस्टलाइन संरचनाओं में परिष्कृत कर इसका उत्पादन किया जाता है। बाद में उसे वेफर्स सौर सेल और आ​खिरकार फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल बनाने के लिए पिघलाया जाता है।

आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और चीन से सस्ते आयात पर निर्भरता कम करने की योजना के तहत भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी सौर विनिर्माण क्षमता का विस्तार किया है। यह विस्तार काफी हद तक एडवांस्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स ऐंड मैन्युफैक्चरर्स (एएलएमएम) योजनाओं पर आधारित है। फिलहाल भारत की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 172 गीगावॉट और सेल उत्पादन क्षमता लगभग 65 गीगावॉट है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, ‘हमने इन क्षेत्रों में पर्याप्त क्षमता निर्माण किया है। मगर हम अभी भी कुछ घटकों के लिए आयात पर निर्भर हैं। ऐसे में हम पॉलिसिलिकन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक योजना पर वित्त मंत्रालय से बातचीत कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने पॉलिसिलिकन के लिए एएलएमएम पेश नहीं किया है क्योंकि वैश्विक स्तर पर इंगट्स-टू-मॉड्यूल मूल्य श्रृंखला पर सौर विनिर्माताओं का वर्चस्व है। वही कंपनियां पॉलिसिलिकन नहीं बना सकती हैं क्योंकि यह एक अलग क्षेत्र है।

वैश्विक स्तर पर पॉलिसिलिकन उद्योग बेहद केंद्रित है जहां कुल उत्पादन में चीन की कंपनियों की हिस्सेदारी 93 फीसदी से अधिक है। यह क्षेत्र सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) के लिए ही नहीं बल्कि सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भी प्राथमिक फीडस्टॉक आपूर्तिकर्ता के रूप में कार्य करता है।

पिछले महीने मंत्रालय ने इंगट्स और वेफर्स के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एएलएमएम सूची-3 पेश की थी। इसके तहत जून 2028 से सौर परियोजनाओं को इन घटकों को घरेलू आपूर्ति से हासिल करना होगा। इससे एक एकीकृत सौर आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिलेगा।

First Published : April 8, 2026 | 11:07 PM IST