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म्यांमार के राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने पर बनी सहमति

म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को आश्वासन दिया कि उनके देश की धरती का उपयोग किसी भी ​​स्थिति में भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- June 01, 2026 | 10:13 PM IST

म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए भारत उससे अपना व्यावहारिक एवं व्यापारिक जुड़ाव और गहरा करने का प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे रणनीतिक रूप से बेहद महत्त्वपूर्ण इस पड़ोसी देश के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ कई मुद्दों पर बातचीत की। दोनों पक्षों ने मौजूदा 2 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को और अ​धिक बढ़ाने, रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की और दुर्लभ खनिजों एवं खनन में सहयोग पर चर्चा भी की। दोनों देशों में रुपया और क्यात में व्यापार करने पर भी बात हुई। म्यांमार के राष्ट्रपति पांच दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं।

आपसी बातचीत के दौरान म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को आश्वासन दिया कि उनके देश की धरती का उपयोग किसी भी ​​स्थिति में भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। भारत की म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय विद्रोही समूहों के म्यांमार के अस्थिर सीमा क्षेत्र से संचालन करने की जानकारी जब तक सामने आती रहती है।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संपर्क परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने कलादान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग को पूरा करने की दिशा में मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अप्रैल में अपने म्यांमार के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद आंग ह्लाइंग की यह पहली विदेश यात्रा है। इन चुनावों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब आलोचना हुई थी, क्योंकि आंग सान सू की नेतृत्व वाली नैशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी और प्रमुख विपक्षी दलों को इनमें भाग लेने से रोक दिया गया था। फरवरी, 2021 में अपने देश के सशस्त्र बलों के कमांडर के रूप में मिन आंग ह्लाइंग ने तख्तापलट में सू ची की चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंका था। उनके इस कदम के बाद अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने उन पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

संवाददाताओं से बातचीत के दौरान सू ची के बारे में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यामांर के राष्ट्रपति के साथ इस मुद्दे को उठाया है और चर्चा मुख्य रूप से म्यांमा में जारी शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई। इस मुद्दे पर भारत के निरंतर रुख को स्पष्ट करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि भारत स्थायी शांति, समावेशिता और सभी हितधारकों को बातचीत की मेज पर लाने की आवश्यकता का समर्थन करता रहा है।

मिसरी ने कहा, ‘यह एक खुली और अनौपचारिक चर्चा थी। मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि म्यांमा के साथ हमारा जुड़ाव उस देश की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करने के उद्देश्य से नहीं है।’

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में व्यापार और आर्थिक संबंधों, रक्षा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों, सीमा प्रबंधन, विकास सहायता और क्षेत्रीय हालात सहित द्विपक्षीय मुद्दों की पूरी श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और एआई जैसी महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में रुचि व्यक्त की।

विदेश सचिव ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की और दोनों पक्षों ने संप्रभु क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के महत्त्व पर बल दिया, ताकि ऐसी गतिविधियों को रोका जा सके जो उनके सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक हों।’

उन्होंने कहा, ‘म्यांमार के राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इस बात को दोहराया कि म्यांमार के क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के विरुद्ध नहीं होने दिया जाएगा।’

मिसरी ने कहा, ‘कुल मिलाकर म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने एक बार फिर दोनों पक्षों की दीर्घकालिक साझेदारी को गहरा करने एवं क्षेत्र में पारस्परिक लाभ, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।’

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रविवार को आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की। म्यांमार के नेता के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योगपति शामिल हैं। राष्ट्रपति ह्लाइंग दो जून को मुंबई भी जाएंगे।

विदेश सचिव ने चीन का संदर्भ देते हुए कहा, ‘अलगाव केवल एक शून्य पैदा करता है जिसे दूसरे हमारे नुकसान के लिए भरते हैं और मेरा मानना  है कि उन दूसरों की लोकतंत्र में कोई रुचि नहीं है।’

First Published : June 1, 2026 | 10:05 PM IST