पश्चिम एशिया में आपूर्ति में व्यवधान के कारण भारत के कच्चे तेल आयात की मात्रा में भारी गिरावट आई है, जिसके परिणामस्वरूप मार्च में देश का कच्चे तेल का आयात बिल सालाना हिसाब से 4.9 प्रतिशत घटकर 11.7 अरब डॉलर रह गया। यह जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों से सामने आई है।
पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण सेल के आंकड़ों के अनुसार मार्च में कच्चे तेल के आयात की मात्रा सालाना स्तर से 17 प्रतिशत घटकर 1.89 करोड़ टन रह गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 2.28 करोड़ थी। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद से सऊदी अरब, इराक, कुवैत और कतर जैसे पश्चिम एशियाई देशों से भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित रही है, जिसके कारण अंततः होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत का कच्चे तेल का आयात बिल घटकर 121.8 अरब डॉलर रह गया, जबकि 2024-25 में यह 137.2 अरब डॉलर था। मार्च 2025 में 72.47 डॉलर प्रति बैरल और फरवरी 2026 में 69.01 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में भारतीय बास्केट कच्चे तेल की कीमत मार्च में औसतन 113.49 डॉलर प्रति बैरल रही, जो काफी अधिक है।
मार्च में भारत के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी सालाना स्तर से 24.5 प्रतिशत घटकर 46 लाख टन रह गया, जो पिछले साल 61 लाख टन था। यह घरेलू बाजार में इन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क लगाने के कारण हुआ है। वर्तमान में सरकार ने डीजल पर 55.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 42 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है।
कच्चे तेल के अलावा, भारत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) जैसे पेट्रोलियम उत्पादों का भी आयात करता है, जबकि डीजल और पेट्रोल जैसे उत्पादों का निर्यात करता है। मार्च में शुद्ध तेल और गैस आयात बिल भी पिछले साल के 11.3 अरब डॉलर से घटकर 11 अरब डॉलर रह गया। एलपीजी की कमी के बीच भारत की एलएनजी खपत मार्च में सात प्रतिशत बढ़कर 5,727 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर हो गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 5,345 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर थी। केंद्र सरकार देश में खाना पकाने के ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक गैस के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
पश्चिम एशिया संकट से एलपीजी की आपूर्ति पर बने दबाव के बीच मार्च से अब तक देश में पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) के 5.01 लाख से अधिक नए कनेक्शनों में आपूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि 5.68 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी।
आपूर्ति गतिरोध के बीच सरकार ने रसोई गैस (एलपीजी) सिलिंडर की तुलना में अधिक सुविधाजनक विकल्प के रूप में पीएनजी को बढ़ावा देने के प्रयास तेज किए हैं। इस दौरान पीएनजी नेटवर्क के दायरे में आने वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी में स्थानांतरित होने के लिए कहा गया है। इसके अलावा गैस पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
शर्मा ने बताया कि 19 अप्रैल तक करीब 39,400 उपभोक्ताओं ने पीएनजी आपूर्ति शुरू होने के बाद अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति फिलहाल स्थिर है और गैस वितरकों के स्तर पर किल्लत की कोई सूचना नहीं है। ऑनलाइन सिलिंडर बुकिंग दर 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि आपूर्ति सत्यापन कोड (डीएसी) पर आधारित आपूर्ति लगभग 92 प्रतिशत हो गई है।
वाणिज्यिक एलपीजी सिलिंडर की उपलब्धता को भी बढ़ाकर संकट से पहले के स्तर के करीब 70 प्रतिशत तक लाया जा चुका है। प्रवासी कामगारों के लिए पांच किलो वजन वाले सिलेंडरों की दैनिक आपूर्ति दोगुनी की गई है और मार्च के अंत से अब तक 19.2 लाख से अधिक छोटे सिलिंडर बेचे गए हैं।