गृह मंत्री अमित शाह | फाइल फोटो
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोक सभा में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पिछले लगभग 12 वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में किए गए विकास कार्यों का विवरण दिया, जो नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए सरकार के कड़े रुख के कारण संभव हो पाया है। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर ‘नक्सल समर्थक’ मौजूद हैं।
शाह ने कहा कि देश में 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। शाह ने सोमवार को लोक सभा में ‘देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयास’ विषय पर हुई चर्चा के दौरान कहा कि वर्ष 2014 में वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 126 जिलों में अब केवल दो ही ऐसे जिले बचे हैं और 2014 में 35 जिलों की तुलना में अब कोई भी ‘सबसे अधिक प्रभावित वामपंथी उग्रवाद जिला’नहीं रह गया है।
शाह ने कहा कि सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से 17,579 किलोमीटर के सड़क तंत्र में 12,000 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में 1804 बैंक शाखाएं, 1321 एटीएम और 6025 डाकघर खोले गए हैं और बैंकों ने 37,850 बैंकिंग प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं। शाह ने कहा,‘यह सब पिछले लगभग 12 वर्षों में हासिल किया गया है।’
उन्होंने इन जिलों में अस्पतालों और पंचायत कार्यालयों के निर्माण की सरकार की योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पिछली कांग्रेस-नेतृत्व वाली सरकारों के उलट राज्य के खिलाफ हथियार उठाने वालों को बेअसर करने के प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। शाह ने केंद्र में और छत्तीसगढ़ जैसे नक्सलवाद प्रभावित राज्यों में अपनी सरकारों के दौरान माओवाद को जड़ से उखाड़ने में विफल रहने के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया।
उन्होंने कहा कि 12 राज्य खराब कानून-व्यवस्था के कारण ‘लाल गलियारा’ में बदल गए हैं, 12 करोड़ लोग वर्षों से गरीबी में जी रहे हैं और नक्सली हिंसा के कारण 5,000 सुरक्षाकर्मियों सहित 20,000 लोग मारे गए हैं। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया था कि नक्सलवाद देश के सामने कश्मीर और उत्तर-पूर्वी समस्याओं से कहीं बड़ी चुनौती है मगर ‘कांग्रेस ने इस बारे में कुछ नहीं किया।’
उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार के दौरान स्थापित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में ‘शहरी नक्सली’ सदस्य थे। उन्होंने कहा कि बस्तर में विकास ठप हो गया था क्योंकि वहां ‘लाल आतंक’ का साया मंडरा रहा था, जो अब छंट रहा है और बस्तर का विकास हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार बस्तर के हर गांव में स्कूल बनवा रही हैं और राशन की दुकानें खोल रही हैं।