भारत

धन संकट से जूझ रहा किफायती आवास बाजार, 1,500 परियोजनाएं अटकीं

2030 तक 2.5 करोड़ किफायती मकानों की जरूरत, फिर भी सप्लाई लगातार घट रही

Published by
रामवीर सिंह गुर्जर   
प्राची पिसल   
Last Updated- May 22, 2026 | 8:52 AM IST

भारत में किफायती आवास क्षेत्र अभी भी गंभीर रूप से अपर्याप्त वित्तपोषण का सामना कर रहा है। एनारॉक कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1,500 से अधिक रुकी हुईं परियोजनाओं में 4.50 लाख से अधिक किफायती और मध्यम श्रेणी के मकान हैं, जिन्हें लगभग 55,000 करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सेगमेंट अभी भी औपचारिक पूंजी और संस्थागत ऋण के फोकस के बाहर है, जबकि भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को अगले 10 वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये पूंजी की आवश्यकता होने का अनुमान है, ताकि यह 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर और 2047 तक 5 से 7 लाख करोड़ डॉलर तक के बाजार तक पहुंच सके। इस समय रियल एस्टेट बाजार 550 अरब डॉलर यानी 55 हजार करोड़ डॉलर का है।

इस रिपोर्ट के अनुसार इस समय भारत में किफायती आवास क्षेत्र में करीब एक करोड़ मकानों की कमी है और 2030 तक कम से कम 2.5 करोड़ किफायती मकानों की आवश्यकता होगी। इसके बावजूद किफायती आवास की आपूर्ति तेजी से घट रही है। 2026 की पहली तिमाही में 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले मकानों की हिस्सेदारी सिर्फ 10 फीसदी रही, जो 2021 में 26 फीसदी थी।

वहीं प्रीमियम आवास सेगमेंट तेजी से बढ़ा है, जिसमें 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले मकान नए लॉन्च का 53 फीसदी हिस्सा रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय संसाधन अधिकतर उच्च मार्जिन वाली परियोजनाओं और मेट्रोपॉलिटन बाजारों में शीर्ष डेवलपर पर केंद्रित हो रहे हैं, जिससे किफायती आवास लगातार अपर्याप्त वित्तपोषण का शिकार है।

एनारॉक कैपिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शोभित अग्रवाल ने कहा कि भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में अब पूंजी की कमी नहीं है। असली चुनौती यह है कि यह पूंजी बड़े डेवलपर और मुख्य शहरों तक सीमित न रह जाए, बल्कि किफायती आवास, छोटे डेवलपर और उभरते टियर 2 और टियर 3 शहरों तक पहुंच सके।

एनारॉक कैपिटल में प्रबंध निदेशक और कॉर्पोरेट फाइनेंस के हेड विशाल श्रीवास्तव कहते हैं कि भारत की किफायती आवास की समस्या अब मांग की नहीं, बल्कि पूंजी आवंटन और वित्तपोषण संरचना की चुनौती बन गई है। रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत के रियल एस्टेट के अगले चरण की वृद्धि अब अधिक पूंजी जुटाने पर नहीं, बल्कि पूंजी तक व्यापक पहुंच बनाने पर निर्भर करेगी।

एनारॉक कैपिटल की इस रिपोर्ट के अनुसार स्वामी कोष-2 से मकानों को काफी वित्त पोषण हो रहा है। विशाल श्रीवास्तव कहते हैं कि 2019 में 15,530 करोड़ रुपये के शुरुआती कोष से शुरू हुए सरकार समर्थित इस कोष ने अब तक 58,596 मकानों को पूरा करने में मदद की है। इससे कुल मिलाकर 1 लाख से ज्यादा मकान पूरे होने की उम्मीद है। बजट 2025–26 में इस कोष ने 15,000 करोड़ रुपये का नया कोष शुरू किया है ताकि 1 लाख और अटके हुए मकान पूरे किए जा सकें।

वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) -2 के तहत 1 करोड़ अतिरिक्त शहरी मकानों का समर्थन किया जाएगा, जबकि किफायती आवास फाइनेंस कंपनियों का एसेट मैनेजमेंट वित्त वर्ष 26-27 में 20 से 21 फीसदी बढ़ने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रेरा, जीएसटी, दिवालियापन और बैंकिंग कोड (आईबीसी), रीट्स नियम और कड़े आरबीआई मानक जैसे कई संरचनात्मक सुधारों ने भारत में रियल एस्टेट वित्तपोषण का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। फरवरी 2026 तक व्यक्तिगत हाउसिंग लोन का बकाया लगभग 38 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह 2029-30 तक 77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र में होम लोन रियल एस्टेट फाइनेंस का सबसे बड़ा हिस्सा हैं।

बैंकों द्वारा वाणिज्यिक रियल एस्टेट में 5.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लोन दिया गया। छह सूचीबद्ध रीट्स का कुल बाजार पूंजीकरण 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वर्तमान में, भारत के 52 करोड़ वर्ग फुट रीट्स योग्य ऑफिस स्टॉक में से केवल 19.8 करोड़ वर्ग फुट (37 फीसदी) ही सूचीबद्ध है। देश में रीट्स का विस्तार अभी भी विकसित देशों की तुलना में काफी कम है। रीट्स का मार्केट कैप केवल स्टॉक मार्केट कैप का 0.4 फीसदी है। यह सूचीबद्ध रियल एस्टेट मार्केट वैल्यू का सिर्फ 20 फीसदी है, जो विकसित बाजारों के मुकाबले काफी कम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक रियल एस्टेट और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) आधारित कार्यालयों का विकास अगले बड़े लंबी अवधि के पूंजी निवेश के लाभार्थी होंगे। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 8 गीगावाट से अधिक होने की उम्मीद है। वेयरहाउसिंग स्टॉक 60.5 करोड़ वर्ग फुट से अधिक बढ़ चुका है।

जीसीसी और प्रौद्योगिकी कंपनियों के कारण 2030 तक 1.2 अरब वर्ग फुट ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ सकती है। ये सेक्टर लंबी अवधि के लिए, लाभ (यील्ड) केंद्रित और वैश्विक मानकों के अनुसार एक अलग तरह की पूंजी को आकर्षित कर रहे हैं। इससे वित्तपोषण तंत्र और मजबूत व टिकाऊ बन रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजार में अस्थिरता जैसी छोटी अवधि की परेशानियां बनी रहें। लेकिन भारत में मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में निवेश और नियमों में सुधार रियल एस्टेट विकास के लिए एक ठोस आधार हैं। जैसे-जैसे वैश्विक सप्लाई चेन भारत के पक्ष में बदल रही है और एआई आधारित अर्थव्यवस्था उभर रही है, भारत की यह स्थिति बाहरी व्यवधानों को घरेलू अवसरों में बदल सकती है।

वित्तपोषण मामले में आरबीआई का नई परियोजना वित्त ढांचा, गहरी पूंजी बाजार प्रणाली और निजी क्रेडिट की बढ़ती भूमिका मिलकर लेंडिंग सिस्टम को मजबूत कर रही हैं। ऐसे डेवलपर जिनके पास मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज और पूरी हुई इन्वेंट्री है, वे इस अस्थिरता में भी सुरक्षित हैं और बेहतर शर्तों पर पूंजी तक पहुंच सकते हैं।

First Published : May 22, 2026 | 8:52 AM IST