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पश्चिम एशिया संकट से भारत की LNG सप्लाई बदली, रूस-नॉर्वे समेत नए स्रोतों की तलाश तेज

जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि अफ्रीकी देशों ने मार्च में भारत के लिए 18 कार्गो में रिकॉर्ड 12 लाख टन एलएनजी लोड की है

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एस दिनकर   
Last Updated- April 17, 2026 | 11:09 PM IST

प​श्चिम ए​शिया संकट के कारण ईंधन आपूर्ति में पैदा हुए व्यवधान ने भारत के लिए एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आयात के नए रास्ते खुल रहे हैं। इनमें पहले काली सूची में डाले गए आपूर्तिकर्ताओं के साथ-साथ ऐसे स्रोत भी हैं, जिन से वर्षों से ईंधन नहीं खरीदा गया था। जहाज-ट्रैकिंग डेटा और उद्योग स्रोतों के अनुसार दो साल बाद रूस की कंपनी से इसी महीने एलएनजी कार्गो आने वाला है। इसी तरह नॉर्वे से भी सात साल बाद एलएनजी आएगी।

सूत्रों के अनुसार भारत के सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता कतरएनर्जी ने बीते मार्च में ‘फोर्स मेजर’ (अप्रत्या​शित घटना) घो​षित कर दिया था। इसके बाद आयातकों नए ठिकानों की तलाश शुरू कर दी थी। कतरएनर्जी के अनुसार, कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का लगभग पांचवां हिस्सा तीन से पांच साल में चालू हो पाएगा।

व्यापारिक स्रोतों ने बताया कि आं​शिक रूप से अफ्रीका से स्पॉट आपूर्ति शुरू की गई है, लेकिन यह पश्चिम एशिया के मुकाबले दोगुनी महंगी पड़ रही है और भारत आने में समय भी ज्यादा लग रहा है। यूरोपीय संघ द्वारा 25 अप्रैल से रूस की यमल एलएनजी से स्पॉट खरीद पर प्रतिबंध लगाने के बाद भारत पर आपूर्ति दबाव बढ़ गया था।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार भारत ने पिछली बार अप्रैल 2024 में यमल (रूस) से एलएनजी खरीदी थी। जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि अफ्रीकी देशों ने मार्च में भारत के लिए 18 कार्गो में रिकॉर्ड 12 लाख टन एलएनजी लोड की है। इनमें से छह कार्गो पिछले महीने ही आ चुके हैं जबकि शेष 12 अप्रैल में आ जाएंगे। पिछले साल भारत के औसत मासिक आयात की लगभग एक तिहाई यानी 7,54,000 टन अफ्रीकी एलएनजी अब तक लोड की जा चुकी है, जिनमें सात कार्गो मई में और पांच इसी महीने आने की उम्मीद है।

व्यापारियों ने कहा कि ये कार्गो स्पॉट बाजार में 17 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट से अधिक की दर पर खरीदे गए। केप्लर और वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार, नॉर्वे का एलएनजी लदा जहाज ‘आर्कटिक लेडी’ अप्रैल की शुरुआत में सरकार द्वारा संचालित इक्विनोर के स्नोविट टर्मिनल से रवाना हो चुका है, जो 12 मई को गुजरात के दहेज टर्मिनल पहुंच जाएगा। इससे पहले, भारत में दिसंबर 2019 में इक्विनोर से एक कार्गो आया था। दीपक फर्टिलाइजर्स ने 2026 से प्रति वर्ष 6,50,000 टन एलएनजी की आपूर्ति के लिए इक्विनोर के साथ 15 साल का अनुबंध किया है।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, रूस की पोर्टोवाया कंपनी, जिसे 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंधित कर दिया था, से इसी महीने सरकारी पेट्रोनेट दहेज टर्मिनल पर एलएनजी लदा जहाज आ सकता है। केप्लर के शुक्रवार तक के आंकड़ों के अनुसार, कुनपेंग नामक एक जहाज 21 दिसंबर को पोर्टोवाया से रवाना हुआ है, जो दक्षिण चीन सागर में दक्षिण की ओर बढ़ रहा है। इसके 25 अप्रैल को दहेज टर्मिनल आ जाने का संकेत मिला है। व्यापारियों का कहना है कि भारत अमूमन प्रतिबंधित एलएनजी खरीदने से परहेज करता है। इसलिए यह संभव है कि कुनपेंग अंततः चीन के बेईहाई में उतरे। यह प्रतिबंधित एलएनजी कार्गो मंगाने वाला एकमात्र बंदरगाह है।

प्रतिबंधित ईंधन

ब्रिटेन की उद्योग डेटा प्रदाता एनर्जी इंटेलिजेंस ने कहा कि पोर्टोवाया का इसी सप्ताह चार महीने बाद पहला कार्गो प्रतिबंधित टैंकर पर चीन पहुंचा है। चीन ने ईरान, रूस और वेनेजुएला से तेल और गैस खरीदने के मामले में अमेरिकी प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर दिया है। एक वरिष्ठ रिफाइनिंग अधिकारी ने कहा कि भारत ने प्रतिबंधित जहाजों से परहेज किया है। एनर्जी इंटेलिजेंस के अनुसार, कुनपेंग एक हॉन्ग कॉन्ग स्थित कंपनी का जहाज है, जो प्रतिबंधित नहीं है।

कुनपेंग के भारत आने का मतलब है कि यहां के आयातक प्रतिबंधित कंपनियों से एलएनजी कार्गो लेने के इच्छुक हैं। अधिकारी ने कहा कि भारत ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों से अ​धिक से अ​धिक एलएनजी खरीदने के लिए कहा है, जबकि पश्चिम एशियाई संकट के कारण प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में कई इकाइयां बंद पड़ी हैं। जनवरी में भारत ने 26 लाख टन एलएनजी आयात की थी, इसमें से आधी पश्चिम एशिया से आई थी। इसमें भी अकेले कतर से 83 प्रतिशत खरीदी गई।

केप्लर के आंकड़ों से पता चला है कि भारत ने मार्च में 16.7 लाख टन एलएनजी का आयात किया। फरवरी से इसमें 13 प्रतिशत की गिरावट आई जो जनवरी के मुकाबले लगभग 10 लाख टन कम थी। यही नहीं, एक साल पहले की तुलना में यह 16 प्रतिशत कम रही।

First Published : April 17, 2026 | 11:05 PM IST