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रिसर्च और इनोवेशन में निवेश से आत्मनिर्भर बन सकेगा देश: उदय कोटक

कोटक ने मिडिल मैन्युफैक्चरिंग यानी मझोले स्तर के विनिर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- April 07, 2026 | 11:09 PM IST

देश का उद्योग जगत शोध और नवाचार में पर्याप्त निवेश नहीं कर रहा है और आयातित तकनीकों तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर है। यह कहना है कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और निदेशक उदय कोटक का। उन्होंने मंगलवार को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) के एक कार्यक्रम में कहा कि यदि भारत वास्तव में ‘आत्मनिर्भर’ बनना चाहता है तो अनुसंधान और नवाचार में निवेश को केंद्र में रखना होगा।

उन्होंने कहा, ‘हम अपने मुनाफे का कितना हिस्सा अनुसंधान और नवाचार में खर्च कर रहे हैं? बहुत कम। क्योंकि हमें लगता है कि हम तकनीक खरीद सकते हैं, चीन से दुर्लभ खनिज खरीद सकते हैं, अमेरिका से माइक्रोसॉफ्ट और अन्य तकनीकें ले सकते हैं। लेकिन आत्मनिर्भर भारत कहां है।’

कोटक ने कहा कि भारतीय कंपनियां उत्पाद बनाने पर ध्यान नहीं देतीं, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हमारी कंपनियां सेवाओं पर केंद्रित रही हैं, न कि बड़े पैमाने वाले उत्पाद बनाने पर। उन्होंने कहा कि किसी भी आईटी सर्विस कंपनी से बात करें, वे कहते हैं कि हम सेवाओं पर केंद्रित हैं। मुश्किल से ही कोई उत्पाद बनाने की ओर बढ़ता है। दूसरी ओर, अमेरिका में कंपनियां सेवाओं का उपयोग करके उत्पाद बनाने पर ध्यान देती हैं।

कोटक ने मिडिल मैन्युफैक्चरिंग यानी मझोले स्तर के विनिर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसमें ऐसी परियोजनाएं आती हैं जिनमें 100 करोड़ रुपये से 1,000 करोड़ रुपये तक का निवेश होता है। उन्होंने इसे भारत की औद्योगिक पारिस्थितिकी में एक गुम हुई कड़ी बताया।

उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि आत्मनिर्भर भारत के लिए सबसे बड़ा क्षेत्र ‘मिडल मैन्युफैक्चरिंग’ है। यही सबसे कमजोर क्षेत्र है जिस पर हमें ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’

कोटक ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में संघर्ष और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की टिप्पणियां वैश्विक औपनिवेशिकता की वापसी का संकेत देती हैं।
उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक घटनाओं की तुलना 1945 से पहले के दौर से की और चेतावनी दी कि व्यवसायों को स्थिरता की वापसी को तय मानकर नहीं चलना चाहिए।

व्यापार के दृष्टिकोण से उन्होंने दो संभावित परिदृश्य बताए। पहला, 1945 के बाद की प्रवृत्ति का जारी रहना, जहां संकटों के बाद धीरे-धीरे स्थिरता लौट आती है। दूसरा, 1945 से पहले के दौर जैसा संरचनात्मक बदलाव, जिसमें लंबे समय तक अस्थिरता और शक्ति की पुनर्संरचना होती है।

कोटक ने कहा, ‘हालिया इतिहास देखें तो पहला परिदृश्य बहुत अधिक संभव है। लेकिन यदि दूसरे परिदृश्य की संभावना 10 से 20 प्रतिशत भी है, तो यह समीकरणों को नाटकीय रूप से बदल देता है। इसलिए, चाहे संभावना कम हो, प्रभाव बहुत बड़ा है। मेरा अनुरोध है कि इसे कभी शून्य न मानें।’


(प्रकटीकरण: कोटक परिवार द्वारा नियंत्रित संस्थाओं की बिज़नेस स्टैंडर्ड प्राइवेट लिमिटेड में महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी है)

First Published : April 7, 2026 | 10:49 PM IST