देश के आयकर विभाग ने हजारों नोटिस जारी किए हैं जो धर्मार्थ न्यास (चैरिटेबल ट्रस्ट), व्यापार संघों और शैक्षणिक संस्थानों को भेजे गए हैं। सूत्रों के मुताबिक इन नोटिस में यह सवाल उठाया गया है कि क्या कुछ आय स्रोत वास्तव में आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कर छूट के पात्र हैं।
यह नोटिस तब जारी किए गए जब इन संगठनों ने आयकर अधिनियम के तहत अपनी कर-छूट स्थिति के पंजीकरण या नियमित नवीकरण के लिए आवेदन किया था। इस पंजीकरण के तहत, चैरिटेबल संस्थाओं को अपनी आय पर धारा 12ए के तहत छूट का दावा करने की अनुमति मिलती है जबकि धारा 80जी के तहत मंजूरी हासिल करने से दानदाताओं को कर कटौती का लाभ मिलता है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए नोटिस की प्रतियों के अनुसार, कर प्राधिकरणों ने कुछ आय प्राप्तियों को ‘व्यावसायिक प्रकृति’ का बताया है, जो धारा 2(15) के प्रावधान का उल्लंघन कर सकते हैं। इस प्रावधान के तहत ‘चैरिटेबल उद्देश्य’ की परिभाषा दी गई है और यह ऐसी संस्थाओं को व्यापार या वाणिज्यिक गतिविधियों को चलाने से प्रतिबंधित करती है।
वित्त मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिला। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर विवेक जलान के अनुसार अगर चैरिटेबल संस्थाओं के उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वे दशकों से धारा 11 के तहत छूट का लाभ ले रही हैं और आयकर विभाग ने हर साल इसकी मंजूरी दी है ऐसे में अब इन स्थापित स्थितियों को चुनौती नहीं दी जा सकती।