विदेश मंत्री एस. जयशंकर | फाइल फोटो
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच महत्त्वपूर्ण बैठक बेनतीजा रही। इस बैठक की कवायद और इसके बेनतीजा रहने से भारत के विदेश मंत्रालय का यह अंदाजा सही साबित हुआ कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन की हां में हां मिलाने वाला पाकिस्तान एक ऐसा भरोसेमंद मध्यस्थ साबित नहीं हो सकता जिस पर ईरान विश्वास कर सके।
हालांकि, भारत पश्चिम एशिया से संबंधित घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और उसे उम्मीद है कि ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ताओं के आगामी दौर (जिनमें दो सप्ताह से चल रहे अनिश्चित युद्धविराम के दौरान गुप्त वार्ताएं भी शामिल हैं) पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने में कारगर रहेंगे। भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। भारत अपनी तेल की जरूरत का ज्यादातर हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते मंगाता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में रहने और काम करने वाले उसके 1 करोड़ नागरिकों का भविष्य भी दांव पर लगा हुआ है। पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत के महत्त्वपूर्ण व्यापारिक संबंध भी रहे हैं।
रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश दिया। उन्होंने यूएई द्वारा 42 दिनों तक चले संघर्ष के कठिन दौर में वहां रहने वाले 35 लाख भारतीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए यूएई की सराहना की।
जयशंकर ने संघर्ष के संबंध में यूएई का दृष्टिकोण जानने का प्रयास किया और ऊर्जा सहयोग सहित भारत-यूएई संबंधों के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा की। यूएई नेतृत्व के साथ अपनी मुलाकात के बाद दुबई में एक जयशंकर ने एक समाचार एजेंसी से कहा,‘स्पष्ट रूप से इस (पश्चिम एशियाई) क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा से भारत के हित जुड़े हुए हैं। मुझे यहां आकर सीधी मुलाकात करने, अपने हितों को व्यक्त करने और भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया जानने का अवसर पाकर खुशी हुई है।’
जयशंकर यूएई की दो दिवसीय यात्रा पर थे जिस दौरान उन्होंने उप- प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान तथा दुबई के क्राउन प्रिंस हमदान बिन मोहम्मद से भी मुलाकात की। यूएई के विदेश मंत्री ने जयशंकर के साथ उनके देश पर ईरान के हमलों से उत्पन्न हालात पर चर्चा की।
पिछले एक दशक में यूएई इस क्षेत्र में भारत का सबसे करीबी मित्र बनकर उभरा है। जयशंकर की यात्रा और यूएई नेतृत्व के साथ हुई बातचीत ने इस कठिन दौर में ‘मित्रों को एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए’ के प्रति नई दिल्ली के इस प्रयास को रेखांकित किया।
भारत ने तेहरान के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। शनिवार को जहाजरानी मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने घोषणा की कि भारतीय ध्वज वाला जहाज जग विक्रम (जिसमें 24 भारतीय चालक दल सदस्य सवार थे और जो 20,412 एलपीजी ले जा रहा था) 11 अप्रैल को फारस की खाड़ी क्षेत्र से सफलतापूर्वक रवाना हो गया और अनुमान है कि यह 15 अप्रैल को किसी भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जाएगा। नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने शनिवार को घोषणा की कि भारत ने ईरान को चिकित्सा सामग्री की दूसरी खेप भी भेजी है।
इस बीच, पाकिस्तान सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता मिलने का इंतजार कर रहा है। वहां के समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सूत्रों का हवाला दिया गया है। यह घटनाक्रम पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब की आईएमएफ-विश्व बैंक की वसंतकालीन बैठकों में भाग लेने के लिए वॉशिंगटन यात्रा के बाद सामने आया है।
हाल में, यूएई ने इस्लामाबाद से बकाया 3.5 अरब डॉलर का ऋण चुकाने की मांग की है। आईएमएफ ने यह शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं (सऊदी अरब, चीन और यूएई) को तीन वर्षीय कार्यक्रम के पूरा होने तक देश में अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी। डॉन के मुताबिक कतर यूएई की जगह पाकिस्तान के ऋणदाताओं में शामिल हो सकता है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह अप्रैल अंत तक यूएई को 3.5 अरब डॉलर का ऋण चुका देगा जो 2018 से लंबित था।
इस बीच, विदेश सचिव विक्रम मिसरी रविवार को पेरिस पहुंचे। पेरिस में वह फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स के साथ भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे। दोनों पक्ष रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार आदि क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ नवीनतम वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा करेंगे।
मिसरी बर्लिन भी जाएंगे जहां वे जर्मन विदेश कार्यालय के राज्य सचिव गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे। चर्चा में व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा आदि द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ पारस्परिक हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मामलों पर भी बात होगी।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर 14 से 17 अप्रैल तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। चांसलर स्टॉकर की यह भारत की पहली यात्रा होगी।