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प्राइवेट सेक्टर में बदल सकते हैं छुट्टी के नियम, पितृत्व अवकाश पर नई बहस शुरू

निजी क्षेत्र में पितृत्व अवकाश लागू करने की सिफारिश, लैंगिक समानता पर जोर

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अहोना मुखर्जी   
Last Updated- May 07, 2026 | 9:04 AM IST

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने श्रम मंत्रालय से पितृत्व अवकाश नीतियों में चरणबद्ध सुधार लाने का आह्वान किया है। परिषद का कहना है कि अभी भी पितृत्व अवकाश का ढांचा सीमित और खंडित है और निजी क्षेत्र में ऐसे अवकाश के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है।

शोधपत्र ‘रीइमैजिनिंग द केयर इकनॉमी : फ्रॉम प्राइवेट बर्डन टू सोशल ऐंड इकनॉमिक इन्फ्रास्ट्रक्चर’ में पितृत्व अवकाश के सुधारों के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इसमें सिफारिश की गई है कि पहला कदम निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वैधानिक पितृत्व अवकाश का विस्तार करना होना चाहिए। शोधपत्र के अनुसार ‘दूसरे चरण में श्रम मंत्रालय (एमओएल) लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए इन अवकाशों की अवधि पर पुनर्विचार कर सकता है। मंत्रालय मातृत्व, पितृत्व और लैंगिक समानता वाले पितृत्व अवकाशों के अधिक संतुलित संयोजन को अनिवार्य बनाने पर विचार कर सकता है।’

शोधपत्र में श्रम व रोजगार मंत्रालय की 2024 की सलाह का हवाला दिया गया है। इस सलाह में नियोक्ताओं से पितृत्व अवकाश, माता-पिता अवकाश और काम करने के लचीले इंतजाम जैसे परिवार-अनुकूल उपायों को अपनाने का आग्रह किया गया है। इससे देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों में बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा। शोधपत्र में इस बदलाव को संभव बनाने के लिए धन मुहैया कराने का सहायक ढांचा तैयार करने का भी प्रस्ताव दिया गया है।

इसमें सुझाव दिया गया कि सरकार बाजार-आधारित साधनों को बढ़ावा दे सकती है। इसमें भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी एजेंसियां अंशदायी माता-पिता अवकाश बीमा उत्पाद शुरू कर सकती हैं। इस मॉडल के तहत नियोक्ता और कर्मचारी रोजगार के दौरान सह-भुगतान करेंगे और अवकाश के दौरान भुगतान प्राप्त करेंगे। इससे नियोक्ता पर मातृत्व लाभों के लिए पूरी तरह से धन मुहैया कराने का बोझ कम होगा।

सरकार कम आय वाले श्रमिकों के लिए अंशदान पर सब्सिडी दे सकती है ताकि प्रणाली को अधिक समावेशी बनाया जा सके। शोधपत्र में यह भी बताया गया है कि भारत का पितृत्व अवकाश ढांचा अभी भी सीमित और खंडित है, और निजी क्षेत्र में ऐसे अवकाश के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। केंद्र सरकार के पुरुष कर्मचारी 15 दिनों के पितृत्व अवकाश के हकदार हैं, लेकिन निजी क्षेत्र के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

First Published : May 7, 2026 | 9:04 AM IST