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MSMEs के लिए कारोबारी जरूरतों के मुताबिक बने कर्ज मॉडल: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

सिडबी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा, ‘सामान्य ऋण योजना गैर-मानक वाले कारोबारों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते।’

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- May 25, 2026 | 11:38 PM IST

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और बैंकिंग प्रणाली से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए मानक ऋण योजनाओं  के साथ कुछ विशेष ऋण मॉडल पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि देश के छोटे उद्योगों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए एकसमान ऋण मॉडल पर अमल किए जाने के बजाय उन्हें उनके कारोबारी चक्र के अनुसार ही कर्ज मिलना चाहिए। सिडबी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा, ‘सामान्य ऋण योजना गैर-मानक वाले कारोबारों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते।’

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘कृषि आधारित उद्यम हर महीने कमाई नहीं करते। पर्यटन उद्योग की आय मौसम पर निर्भर करती है और इसीलिए एक रिसॉर्ट पूरे साल भर समान रूप से कमाई नहीं कर पाता। कपड़ा निर्यातकों को माल भेजने के बाद भी भुगतान का इंतजार करना पड़ता है और वाहन कलपुर्जे की आपूर्ति करने वालों के भुगतान में भी समय लगता है। एक महिला उद्यमी नियमित रूप से लेन-देन कर सकती है लेकिन फिर भी उसके नाम कोई संपत्ति नहीं होगी। ऐसे में सभी को एक जैसी पुनर्भुगतान व्यवस्था देना क्यों सही है?’उन्होंने कहा कि ऋण योजनाएं, उद्यमों के कारोबारी चक्र के अनुरूप होनी चाहिए।

सीतारमण ने सुझाव दिया कि कृषि प्रसंस्करण से जुड़े एमएसएमई इकाइयों के लिए ऋण भुगतान को फसल चक्र से जोड़ा जाए। वहीं कपड़ा निर्यातकों के लिए निर्यात चक्र और पर्यटन कारोबार के लिए मौसमी आय के हिसाब से भुगतान व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। सीतारमण ने कहा, ‘हमारा लक्ष्य सही उद्यम को सही समय पर सही उद्देश्य के लिए उचित कर्ज उपलब्ध कराना होना चाहिए।’

वित्त मंत्री ने सिडबी से केवल कर्ज देने वाली संस्था नहीं, बल्कि एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए ‘बाजार निर्माता’ और ‘जोखिम साझेदार’ की भूमिका निभाने को कहा। उन्होंने कहा, ‘सिडबी को यह कहना बंद करना चाहिए कि वह छोटे उद्यमों को ऋण देता है। आप बाजार तैयार करने वालों में हैं और आप सभी एमएसएमई और पूरे स्टार्टअप तंत्र के लिए जोखिम साझेदारी वाले साझेदार हैं।’

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सिडबी को स्टार्टअप्स के लिए वेंचर डेट बाजार को मजबूत करने, नकदी आधारित ऋण और डिजिटल ऋण साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर देना चाहिए खासतौर पर पहली बार ऋण देने वालों के लिए।

उन्होंने एमएसएमई के लंबित भुगतानों को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा कर रही है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एमएसएमई का भुगतान 45 दिनों के भीतर करें।

सीतारमण ने कहा कि देश में 32 करोड़ से अधिक लोगों को एमएसएमई क्षेत्र से रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम एमएसएमई के लिए ऋणकी सही व्यवस्था करेंगे तब भारतीय मध्यम वर्ग मजबूत होगा और इससे विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।’

First Published : May 25, 2026 | 11:35 PM IST