भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को ब्रिटेन द्वारा आयोजित 35 देशों की एक आभासी बैठक में शिरकत की। बैठक का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने के उपाय तलाशना था। यह स्ट्रेट अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण बाधित है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि पिछले महीने में छह भारतीय ध्वज वाले जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार किया। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच भारतीय जहाजों के पारगमन के लिए किसी प्रकार के भुगतान पर चर्चा नहीं हुई है। जायसवाल के अनुसार मिस्री ने खाड़ी में वाणिज्यिक नौवहन पर हमलों में नाविकों को खोने वाले एकमात्र देश के रूप में भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव का उल्लेख भी किया।
जायसवाल ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी सभी घटनाओं पर करीबी नजर रख रही है, जिसमें बहरीन का वह प्रयास भी शामिल है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एक प्रस्ताव पारित करे जो वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक उपायों’ को अधिकृत करे। बहरीन अप्रैल माह के लिए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। जायसवाल ने बताया कि भारत अपने पड़ोसी देशों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को तेल की आपूर्ति कर रहा है। मालदीव ने भी भारत से ईंधन आपूर्ति का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा, ‘मालदीव सरकार ने हमसे अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का अनुरोध किया है। इस अनुरोध पर हमारी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है।’ गौरतलब है कि मालदीव अधिकांश ईंधन ओमान से प्राप्त करता है। भारत मॉरीशस और सेशेल्स के साथ भी ऊर्जा के हालात पर चर्चा कर रहा है, हालांकि उनसे कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है। ब्रिटेन द्वारा आयोजित बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हुआ। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करना अमेरिका का काम नहीं है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि विदेश सचिव यवेट कूपर की अध्यक्षता वाली बैठक ‘सभी संभावित कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों का आकलन करेगी ताकि नौवहन की स्वतंत्रता बहाल की जा सके, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही फिर से शुरू की जा सके।’