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Monsoon Update: केरल में मानसून की एंट्री का काउंटडाउन शुरू, IMD ने बताई तारीख; कम बारिश का भी अलर्ट

Monsoon Update: आईएमडी ने कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में केरल पहुंच सकता है, जबकि केंद्र ने कम बारिश की आशंका को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

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संजीब मुखर्जी   
एजेंसियां   
Last Updated- June 02, 2026 | 8:25 AM IST

Monsoon 2026 Update: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। मानसून के आगमन में देरी के बीच केंद्र सरकार ने कम बारिश की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत फसल और मौसम की निगरानी के लिए विशेष समूहों का गठन किया गया है तथा राज्यों को संकट प्रबंधन योजना भी भेजी गई है।

Monsoon 2026 के आगमन के लिए अनुकूल बने हालात

आमतौर पर केरल में मानसून की शुरुआत 1 जून के आसपास मानी जाती है। मौसम विभाग ने पहले अनुमान लगाया था कि इस वर्ष मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। विभाग ने बाद में अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए कहा था कि मानसून अगले सप्ताह के दौरान दस्तक दे सकता है।

आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में भी मानसून के विस्तार की संभावना जताई गई है।

बारिश की निगरानी के लिए बना विशेष समूह

केंद्र सरकार ने बताया कि फसल और मौसम की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक “क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप” का गठन किया गया है। यह समूह प्रत्येक सोमवार को बैठक कर वर्षा की स्थिति, बुवाई की प्रगति, जलाशयों में जल स्तर, कृषि इनपुट की उपलब्धता, कीट प्रकोप और कीमतों के रुझान की समीक्षा करता है।

इसके अलावा राहत आयुक्तों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को शामिल करते हुए एक अलग संकट प्रबंधन समूह भी बनाया गया है। कृषि मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से जिला स्तर की आकस्मिक योजनाएं तैयार कर रहा है और मानसून की तैयारियों को लेकर राज्यों के अधिकारियों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी कर रहा है।

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Monsoon 2026: इस साल सामान्य से कम रह सकती है बारिश

आईएमडी ने पिछले सप्ताह जारी संशोधित पूर्वानुमान में कहा था कि इस वर्ष मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। विभाग के अनुसार, देश में इस बार दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान है।

दीर्घकालिक औसत किसी क्षेत्र में 30 से 50 वर्षों की अवधि के दौरान दर्ज औसत वर्षा को कहा जाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे भारत के लिए मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर है।

क्या होता है ‘डिफिशिएंट’ मानसून?

मौसम विभाग के मानकों के अनुसार यदि किसी मानसून सीजन में वर्षा दीर्घकालिक औसत के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसे “डिफिशिएंट” यानी कम वर्षा वाला मानसून माना जाता है। ऐसे में कृषि उत्पादन, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

First Published : June 2, 2026 | 8:25 AM IST