Monsoon arrives in Kerala: मॉनसून ने गुरुवार को भारत के सबसे दक्षिणी राज्य केरल के तट पर दस्तक दे दी। मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मॉनसून सामान्य समय से करीब तीन दिन देरी से पहुंचा है। हालांकि, इसकी आमद से भीषण गर्मी और लू से जूझ रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इधर दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम ने करवट ली और कई जगहों पर झमाझम बारिश शुरू हो गई।
IMD को उम्मीद है कि अगले डेढ़ महीने में मॉनसून पूरे देश में फैल जाएगा। जून से सितंबर तक चलने वाले इस बारिश के मौसम से देश को सालाना वर्षा का करीब 70 फीसदी हिस्सा मिलता है। खेती, जलाशयों, भूजल स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सेहत काफी हद तक मॉनसून के प्रदर्शन पर निर्भर करती है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने गुरुवार को केरल में दस्तक दे दी। आमतौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और अगले डेढ़ महीने में पूरे देश में फैल जाता है।
IMD ने कहा कि 4 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने अरब सागर के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व, पश्चिम-मध्य और पूर्व-मध्य हिस्सों, पूरे लक्षद्वीप क्षेत्र, केरल और माहे, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, कोमोरिन क्षेत्र के शेष भाग तथा बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़त दर्ज की है।
मौसम विभाग ने इससे पहले अनुमान जताया था कि मॉनसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा, लेकिन इसकी शुरुआत में देरी हुई। आखिरकार गुरुवार को केरल में मॉनसून के आगमन के साथ देश के वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत हो गई।
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केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की दस्तक के साथ ही दिल्ली-एनसीआर के मौसम ने भी अचानक करवट ले ली। गुरुवार दोपहर राजधानी दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ घने बादल छा गए, जिसके बाद कई जगहों पर जोरदार बारिश हुई।
नोएडा में दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच मौसम इतना खराब हो गया कि दिन में ही अंधेरा छा गया। काले बादलों की वजह से सड़कों पर वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। कुछ समय के लिए माहौल रात जैसा नजर आया।
बारिश और ठंडी हवाओं से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। हालांकि, तेज आंधी और धूलभरी हवाओं के कारण कई इलाकों में लोगों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा। कुछ जगहों पर यातायात प्रभावित हुआ और पेड़ों की शाखाएं टूटने की घटनाएं भी सामने आईं।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक मौसम सुहावना बना रह सकता है। इस दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है और कुछ इलाकों में हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। IMD का अनुमान है कि मौसम में यह बदलाव 6 जून तक जारी रह सकता है।
IMD के मॉनसून की चाल दिखाने वाले मैप के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दे दी है और इसके साथ ही यह लक्षद्वीप, माहे, तमिलनाडु, कर्नाटक के कुछ हिस्सों तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बड़े क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। अगले कुछ हफ्तों में मॉनसून उत्तर और पश्चिम भारत की ओर तेजी से बढ़ेगा। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, जून के मध्य तक यह मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा, जबकि जुलाई के पहले सप्ताह तक दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिम भारत में पहुंच जाएगा।
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| संभावित तारीख | राज्य/क्षेत्र |
|---|---|
| 4 जून | केरल, दक्षिण तमिलनाडु |
| 5 जून | कर्नाटक, पूर्वोत्तर भारत (असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश) |
| 10 जून | महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा के अधिकांश हिस्से |
| 15 जून | मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार के कुछ हिस्से |
| 20 जून | पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार का शेष भाग, पश्चिम बंगाल, गुजरात के कुछ हिस्से |
| 25 जून | गुजरात का अधिकांश हिस्सा, राजस्थान का पूर्वी भाग, उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा |
| 30 जून | पश्चिमी राजस्थान, हरियाणा के कुछ हिस्से |
| 5 जुलाई | दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू क्षेत्र |
| 8 जुलाई | पश्चिमी राजस्थान और उत्तर-पश्चिम भारत के शेष हिस्से |
नोट: यह IMD के मानचित्र में दर्शाई गई संभावित मॉनसून आगमन तिथियां हैं। वास्तविक आगमन मौसमीय परिस्थितियों के अनुसार कुछ दिन आगे-पीछे हो सकता है।
पिछले सप्ताह IMD ने इस साल के मॉनसून सीजन के लिए अपने वर्षा अनुमान में संशोधन करते हुए कहा था कि देश में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 2026 में देशभर में मॉनसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (Long Period Average-LPA) का लगभग 90 फीसदी रहेगी। एलपीए किसी क्षेत्र में लंबे समय, आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के दौरान दर्ज औसत वर्षा को दर्शाता है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे देश के लिए मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर है।
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IMD के मानकों के अनुसार, यदि मॉनसून के दौरान वर्षा एलपीए के 90 फीसदी से कम रहती है, तो उसे ‘सामान्य से कम’ (Deficient) कैटेगरी में रखा जाता है।
मौसम विभाग का मानना है कि इस साल बारिश सामान्य से कम रहने की एक बड़ी वजह अल नीनो (El Nino) की स्थिति हो सकती है। अल नीनो के दौरान भारत में मॉनसूनी वर्षा पर नकारात्मक असर पड़ता है और आमतौर पर बारिश कम होती है।
आईएमडी के मुताबिक, जून में अल नीनो का प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है, लेकिन सितंबर तक इसके मध्यम से मजबूत होने के संकेत हैं।